नई दिल्ली, 01 मई।
उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुईयां शर्मा द्वारा दर्ज कराए गए एफआईआर मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है, जिसका आदेश न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया।
अदालत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा प्रतीत होता है, ऐसे में आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया है तथा यह भी स्पष्ट किया है कि वे बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जा सकेंगे। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि वे किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करेंगे और न ही किसी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास करेंगे।
इससे पहले पवन खेड़ा ने रिनिकी भुईयां द्वारा दर्ज एफआईआर के खिलाफ गौहाटी उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे खारिज करते हुए अदालत ने टिप्पणी की थी कि उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए एक निर्दोष महिला को विवाद में घसीटा।
गौहाटी उच्च न्यायालय के निर्णय से पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय ने उन्हें 10 अप्रैल को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, जिसे बाद में असम पुलिस ने चुनौती दी और उच्चतम न्यायालय ने 15 अप्रैल को उस पर रोक लगा दी थी।
मामले की पृष्ठभूमि में असम में दर्ज एफआईआर के बाद 7 अप्रैल को दिल्ली स्थित पवन खेड़ा के आवास पर पुलिस ने छापेमारी की थी, हालांकि उस समय वे अपने घर पर मौजूद नहीं थे। यह एफआईआर पवन खेड़ा द्वारा रिनिकी भुईयां पर एक से अधिक पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए जाने के बाद दर्ज की गई थी।



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