चंडीगढ़, 01 मई।
पंजाब विधानसभा द्वारा पारित ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026’ को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं और मामले की अगली सुनवाई 14 मई तक स्थगित कर दी है
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिकाकर्ता की वैधता, उसके प्रतिनिधित्व अधिकार और एंग्लिकन चर्च ऑफ इंडिया के भीतर वास्तविक प्राधिकरण को लेकर सवाल उठाए।
याचिका में दावा किया गया है कि 2008 के मूल कानून और 2026 के संशोधन के माध्यम से पंजाब सरकार ने एक विशेष धार्मिक ग्रंथ को विशेष कानूनी संरक्षण देकर संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन किया है।
याचिकाकर्ता पक्ष ने तर्क दिया कि यदि पवित्र बाइबल सहित अन्य धार्मिक ग्रंथों को समान संरक्षण नहीं दिया जाता, तो यह धार्मिक आधार पर असमान व्यवहार और संवैधानिक भेदभाव की श्रेणी में आएगा। इसके साथ ही अनुच्छेद 254 के तहत समवर्ती सूची से जुड़े विधायी टकराव का मुद्दा भी उठाया गया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि याचिका दाखिल करने वाला व्यक्ति चर्च की ओर से किस कानूनी अधिकार के तहत उपस्थित हुआ है।
इस पर याचिकाकर्ता पक्ष ने जोरदार प्रतिवाद करते हुए कहा कि उनके प्रतिनिधि की वैधता पूर्व न्यायिक आदेशों और उच्चतम न्यायालय तक में अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार की जा चुकी है।
दोनों पक्षों की दलीलों के बीच उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी संवैधानिक चुनौती पर आगे बढ़ने से पहले यह तय करना आवश्यक है कि अदालत के समक्ष प्रस्तुत पक्ष वास्तव में सक्षम और अधिकृत है या नहीं।









