नई दिल्ली, 06 मई।
सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के हल्द्वानी दंगा और आगजनी प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए दो आरोपियों को दी गई डिफॉल्ट जमानत को निरस्त कर दिया है। शीर्ष अदालत ने संबंधित आरोपियों को निर्देश दिया है कि वे दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करें।
यह मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट के जनवरी 2025 के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब को डिफॉल्ट जमानत प्रदान की गई थी। राज्य सरकार ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा जांच अधिकारी पर की गई टिप्पणी उचित नहीं थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता और जांच एजेंसी के सामने मौजूद परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार की टिप्पणी करना सही नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में जांच प्रक्रिया और एजेंसियों की भूमिका को समझना आवश्यक है। इसी आधार पर हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए आरोपियों को सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है।



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