नई दिल्ली, 06 मई।
भारत के कॉफी निर्यात में जनवरी से अप्रैल 2026 के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मजबूत रोबस्टा और इंस्टेंट कॉफी की बढ़ती मांग के चलते निर्यात में लगभग 26.6 प्रतिशत की छलांग लगकर यह 1.74 लाख टन तक पहुंच गया है।
पिछले वर्ष इसी अवधि में देश से 1.37 लाख टन कॉफी का निर्यात किया गया था। भारत से अरेबिका और रोबस्टा दोनों किस्मों के साथ-साथ इंस्टेंट कॉफी का भी निर्यात किया जाता है, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार मांग बनी हुई है।
मूल्य के लिहाज से भी निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में कुल निर्यात मूल्य बढ़कर 936.57 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 757.07 करोड़ रुपये था। वहीं प्रति टन औसत मूल्य प्राप्ति भी बढ़कर 4,94,766 रुपये प्रति टन हो गई है।
कॉफी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार रोबस्टा कॉफी का निर्यात 36 प्रतिशत बढ़कर 85,168 टन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 62,736.92 टन था। वहीं इंस्टेंट कॉफी का निर्यात भी बढ़कर 20,332 टन हो गया, जो पहले 17,504 टन था।
इसके विपरीत अरेबिका कॉफी के निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो 58 प्रतिशत घटकर 30,589 टन रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 72,479 टन था।
वर्ष 2025 के दौरान भारत का कुल कॉफी निर्यात 3.82 लाख टन रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2026 में भारतीय कॉफी उद्योग नए उत्साह के साथ आगे बढ़ रहा है और वैश्विक बाजार में देश की भूमिका केवल रोबस्टा आपूर्तिकर्ता तक सीमित नहीं रह रही है।
कॉफी बोर्ड के अनुसार 2025-26 के लिए उत्पादन का अनुमान रिकॉर्ड 4,03,000 टन लगाया गया है, जिसमें कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों का योगदान अहम रहेगा। अरेबिका उत्पादन लगभग 1,18,000 टन और रोबस्टा उत्पादन 2,84,000 टन से अधिक रहने का अनुमान है।
हालांकि मौसम में बदलाव और जलवायु से जुड़ी चुनौतियां इस क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।









