जयपुर, 06 मई।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने विदेश यात्रा को हर भारतीय का संवैधानिक अधिकार मानते हुए स्पष्ट किया है कि किसी आपराधिक प्रकरण के लंबित रहने के आधार पर पासपोर्ट जारी करने या उसके नवीनीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि केवल मुकदमा लंबित होना पासपोर्ट सुविधा रोकने का वैध कारण नहीं है और ऐसा करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ-साथ विदेश यात्रा के अधिकार की संवैधानिक गारंटी का भी उल्लंघन है।
न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश त्रिविक्रम सिंह राठौड़ की याचिका का निस्तारण करते हुए दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि पासपोर्ट एक आवश्यक दस्तावेज है, जिसके बिना किसी भी व्यक्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा में प्रवेश संभव नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार भी बिना पासपोर्ट किसी दूसरे देश में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलती, इसलिए इसे रोकना उचित नहीं माना जा सकता।
याचिकाकर्ता ने अपने पासपोर्ट की समय सीमा समाप्त होने पर नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन जयपुर के एक महिला थाने में दर्ज प्रकरण के आधार पर पुलिस की नकारात्मक रिपोर्ट दी गई और इसी आधार पर पासपोर्ट नवीनीकरण से इनकार कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इस निर्णय को निरस्त करते हुए 5 जनवरी 2023 के आदेश को रद्द कर दिया और मामले पर पुनः विचार करने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता बिना न्यायालय की अनुमति विदेश यात्रा नहीं करेगा और यात्रा के बाद मुकदमे की प्रक्रिया में उपस्थित होगा।
अदालत ने यह भी कहा कि जब तक किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं किया जाता, तब तक उसे निर्दोष माना जाएगा। केवल महिला उत्पीड़न और विश्वासघात जैसे आरोपों का मामला लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट नवीनीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश यात्रा के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।



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