बुरहानपुर, 06 मई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को एक दिवसीय दौरे पर बुरहानपुर पहुंचे, जहां उन्होंने ‘उद्यमी संवाद’ कार्यक्रम में उद्योगपतियों से चर्चा की और निमाड़ क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए इन्वेस्टर्स समिट आयोजित करने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने राजनीतिक मंच से विपक्ष पर तीखे बयान भी दिए।
परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों की समस्याएं सुनीं और क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने का आश्वासन दिया। इसके बाद भाजपा के ‘विजय उत्सव’ कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ झालमुड़ी का आनंद लिया और संगठन में उत्साह का संचार किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल और असम में पार्टी की जीत को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की और विपक्ष पर निशाना साधा।
सुबह मुख्यमंत्री रेणुका माता हेलीपैड से सीधे कार्यक्रम स्थल पहुंचे, जहां उद्यमियों ने अपनी मांगें और समस्याएं उनके समक्ष रखीं। उन्होंने कहा कि निमाड़ में इन्वेस्टर्स समिट आयोजित करने का जो वादा किया गया था, उसे हर हाल में पूरा किया जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि व्यापारिक कल्याण बोर्ड के गठन पर कैबिनेट में चर्चा हो चुकी है, जो आगे चलकर जिला स्तर तक कार्य करेगा।
मुख्यमंत्री ने बुरहानपुर के आर्थिक विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां का व्यापार 400 करोड़ रुपये से बढ़कर 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने निंबोला औद्योगिक क्लस्टर के लिए 350 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी किए जाने की जानकारी दी। इस वर्ष को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा करते हुए उन्होंने केला किसानों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही।
कार्यक्रम के बाद आयोजित ‘विजय उत्सव’ में मुख्यमंत्री ने मंच से झालमुड़ी का स्वाद लिया और अन्य नेताओं को भी खिलाया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में विभाजन और वंदे मातरम को लेकर विवाद पैदा करने का कार्य कांग्रेस ने किया। उन्होंने राम मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरे देश की आस्था का विषय है।
मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कुछ नेता परिस्थितियों के बावजूद पद नहीं छोड़ते। उन्होंने बंगाल की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां नई सरकार का गठन एक नए युग की शुरुआत का संकेत है और इसे 75 वर्षों बाद वास्तविक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल और असम में विभिन्न समुदायों का समर्थन भारतीय जनता पार्टी को मिला है और अब ये राज्य देश की मुख्यधारा के साथ जुड़कर विकास की दिशा में आगे बढ़ेंगे।







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