भोपाल, 20 मार्च 2026।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और यह इतिहास में अभूतपूर्व होगा, जब पूरी दुनिया सनातन संस्कृति का वैभव देखेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार की रात विक्रमोत्सव 2026 अंतर्गत शिप्रा के राम घाट पर आयोजित सृष्टि आरम्भ उत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उज्जैन को परमात्मा ने विशेष रूप से चुना है और यहां आने वाला हर व्यक्ति अपने जीवन में सुधार अनुभव करता है। मां शिप्रा के तट पर बसी यह नगरी अनादिकाल से प्रतिष्ठित रही है और इसकी महिमा हर युग में अक्षुण्ण रही।

डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन प्राचीन अवंतिका और उज्जयिनी के नाम से प्रसिद्ध है और यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर का धाम भी है। वर्षप्रतिपदा के दिन विक्रम संवत 2083 का आगमन पूरे शहर में उल्लास के साथ देखा गया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन का उपयोग धर्म, आस्था और संस्कृति के अनूठे संगम को प्रदर्शित करने में किया गया, जो सनातन संस्कृति की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य की विद्वता, वीरता और दानशीलता का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब दो हजार वर्ष पूर्व उन्होंने विदेशी आक्रांताओं को परास्त कर राष्ट्र की रक्षा की और सुशासन का उदाहरण कायम किया। आज इसी गौरवगाथा को पुनर्जीवित करते हुए प्रदेश में विक्रमोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है, जो संस्कृति और प्रशासनिक आदर्शों का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि आगामी सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन को जोड़ने वाले मार्गों को फोरलेन और सिक्सलेन बनाया जा रहा है तथा मां शिप्रा के तट पर लगभग 30 किलोमीटर लंबे नवीन घाट विकसित किए जा रहे हैं। उज्जैन को व्यापार और उद्योग की दृष्टि से भी विकसित किया जा रहा है, जिसमें विक्रम उद्योगपुरी और मेडिकल डिवाइस पार्क शामिल हैं।

डॉ. यादव ने बताया कि 12,500 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र पूर्ण रूप से विकसित हो चुका है और अतिरिक्त 5,000 एकड़ क्षेत्र में नया पार्क तैयार किया जा रहा है। नए एयरपोर्ट और हेलीकॉप्टर सेवाओं से तीर्थाटन को नई ऊंचाई देने का प्रयास होगा। आने वाले समय में उज्जैन धार्मिक, सांस्कृतिक, औद्योगिक और वैश्विक पहचान का केंद्र बनेगा।
विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत गुरुवार की रात गुड़ी पड़वा, सृष्टि आरम्भ उत्सव का भव्य आयोजन रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट पर हुआ, जिसमें आस्था, संस्कृति और आधुनिक तकनीक का संगम देखने को मिला। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रसिद्ध पार्श्वगायक विशाल मिश्रा की मधुर प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हजारों श्रद्धालुओं ने नववर्ष का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। गुड़ी पड़वा के कारण पूरे शहर में धार्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा। भव्य ड्रोन शो, लेजर शो और आतिशबाजी ने शिप्रा तट के आकाश को रोशनी और रंगों से भर दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ का विक्रम पंचांग 2083, संस्कृति संचालनालय का कला पंचांग, बिमल कृष्ण दास की 84 महादेव, रामस्वरूप दास की ओरछाधीश, वीर भारत न्यास के महर्षि अत्रि, महर्षि अंगिरा, धनवंतरी, महर्षि अगस्त्य, भरत मुनि के भारत निधि मोनोग्राफ, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ की अष्टावक्र गीता, नारद गीता, ब्राह्मण गीता, गर्भ गीता, उत्तर गीता का विमोचन किया।
सृष्टि आरम्भ उत्सव ने उज्जैन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आस्था और आधुनिक आयोजन क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया और इसे राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई।












