वाशिंगटन, 25 मई ।
पश्चिम एशिया की राजनीतिक दिशा को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा मुस्लिम और अरब देशों से इजराइल को मान्यता देने की अपील के बाद क्षेत्रीय कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार ट्रम्प का उद्देश्य ईरान के साथ संभावित संघर्ष समाप्त होने के बाद अब्राहम समझौते का विस्तार करना और अधिक देशों को इजराइल के साथ औपचारिक संबंधों की दिशा में जोड़ना है।
जानकारी के अनुसार ट्रम्प ने हाल ही में सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किए, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन सहित कई देशों के नेताओं के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की, जिसमें ईरान के साथ शांति समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान ट्रम्प ने इन देशों से आग्रह किया कि संघर्ष समाप्त होने के बाद वे इजराइल को मान्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएं।
इस प्रस्ताव पर अभी तक कई देशों की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, विशेषकर सऊदी अरब और पाकिस्तान की स्थिति को संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि दोनों देश अब तक इजराइल को औपचारिक मान्यता नहीं देते। बताया गया है कि बातचीत के दौरान कुछ समय के लिए माहौल शांत और मौन रहा।
ट्रम्प की रणनीति का केंद्र अब्राहम समझौता है, जिसके तहत पहले संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मोरक्को जैसे देशों ने इजराइल के साथ संबंध सामान्य किए थे। अब ट्रम्प इस समझौते को और व्यापक बनाने की कोशिश में हैं, हालांकि गाजा संघर्ष के बाद अरब देशों में इजराइल के प्रति विरोध में वृद्धि देखी जा रही है।
सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह तभी इजराइल को मान्यता देगा जब फिलिस्तीन राज्य के गठन की दिशा में ठोस प्रगति होगी, जबकि पाकिस्तान में यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील माना जाता है क्योंकि वहां फिलिस्तीन समर्थन को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त है। इसी बीच ट्रम्प ने यह भी कहा है कि भविष्य में ईरान भी इस समझौते का हिस्सा बन सकता है, हालांकि विशेषज्ञ इसे कठिन संभावना मानते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक अमेरिकी सीनेटर ने मुस्लिम देशों को चेतावनी दी है कि यदि वे इस प्रक्रिया में सहयोग नहीं करते तो भविष्य के कूटनीतिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।








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