उज्जैन, 30 अप्रैल।
उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के प्रसाद में मिलने वाले प्रसिद्ध लड्डू अब आधुनिक हाईटेक मशीनों के माध्यम से तैयार किए जाएंगे। इसके लिए महाकाल मंदिर समिति द्वारा लगभग 40 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है और आगामी दो माह में पूरी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद मशीन आधारित उत्पादन शुरू होने की संभावना है।
महाकालेश्वर मंदिर समिति की सहायक प्रशासक सिम्मी यादव ने गुरुवार को जानकारी दी कि भगवान महाकाल का लड्डू प्रसाद अपनी शुद्धता और स्वाद के कारण देशभर में विशेष पहचान रखता है। मंदिर में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार होता है, लेकिन अधिक मांग के चलते कई श्रद्धालु प्रसाद प्राप्त किए बिना लौट जाते हैं।
उन्होंने बताया कि आने वाले सिंहस्थ 2028 महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति ने हाईटेक लड्डू निर्माण यूनिट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को पर्याप्त मात्रा में प्रसाद उपलब्ध कराया जा सके।
अब तक लड्डू निर्माण चिंतामन मंदिर के सामने स्थित यूनिट में हाथों से किया जाता है, जहां लगभग 65 कर्मचारी सुबह से शाम तक कार्य करते हैं। वर्तमान व्यवस्था में अधिकतम 50 क्विंटल लड्डू प्रतिदिन तैयार होते हैं, जबकि मांग इससे कहीं अधिक रहती है। नई मशीन यूनिट शुरू होने के बाद प्रतिदिन 100 क्विंटल तक लड्डू निर्माण संभव होगा। इसमें बेसन समान रूप से भूना जाएगा तथा घी, शक्कर, ड्रायफ्रूट और अन्य सामग्री निर्धारित अनुपात में मिश्रित की जाएगी, जिससे स्वाद, आकार और गुणवत्ता समान बनी रहेगी।
सिम्मी यादव ने बताया कि टेंडर में कठोर गुणवत्ता मानक निर्धारित किए गए हैं। चयनित वेंडर एक वर्ष तक मशीन स्थापित कर मंदिर समिति को प्रसाद उपलब्ध कराएगा। कच्चे माल में ब्रांडेड चना दाल, शुद्ध घी, ड्रायफ्रूट और शक्कर का उपयोग अनिवार्य होगा तथा गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर 50 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
महाकाल मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर है, जहां लड्डू प्रसाद को एफएसएसएआई की फाइव स्टार रेटिंग प्राप्त है। वर्तमान में यहां प्रतिदिन 40 से 50 क्विंटल लड्डू की खपत होती है, जो शनिवार और रविवार को बढ़कर 50 से 70 क्विंटल तथा विशेष अवसरों पर 100 से 120 क्विंटल तक पहुंच जाती है। वर्तमान में 400 रुपये प्रति किलो की दर से प्रसाद उपलब्ध कराया जाता है, जिसके लिए 50, 100, 200 और 400 रुपये के पैकेट बनाए जाते हैं।
मंदिर समिति द्वारा त्रिवेणी संग्रहालय के सामने अन्नक्षेत्र परिसर में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक यूनिट भवन तैयार कराया गया है, जहां मशीनें स्थापित की जाएंगी। यह यूनिट करीब 50 हजार वर्गफीट क्षेत्र में फैली होगी, जिसका निर्माण उज्जैन विकास प्राधिकरण कर रहा है। इसमें बेसमेंट, भूतल और प्रथम तल शामिल हैं, जिनका क्षेत्रफल लगभग समान है। चयनित वेंडर केवल मंदिर समिति को ही प्रसाद उपलब्ध कराएगा और उसे बाजार में बिक्री की अनुमति नहीं होगी। टेंडर प्रक्रिया के लिए 21 दिन निर्धारित किए गए हैं, जिसके बाद तकनीकी मूल्यांकन होगा और पूरी प्रक्रिया में लगभग दो माह का समय लगेगा।






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