लखनऊ, 18 मई।
उत्तर प्रदेश में सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में योगी कैबिनेट ने बड़ा कदम उठाते हुए 3x800 मेगावाट क्षमता की नई तापीय ऊर्जा परियोजना सहित कुल 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की है। यह परियोजना राज्य की ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। इस 2400 मेगावाट क्षमता वाली महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 38,358 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे उत्तर प्रदेश सरकार एवं एनटीपीसी के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से स्थापित व संचालित किया जाएगा।
बैठक में पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण निर्धारित करने के लिए नए आयोग के गठन, समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसके अलावा लखनऊ मेट्रो के विस्तार को भी मंजूरी दी गई, जिसके तहत चारबाग से बसंतकुंज तक मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।
ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में प्रदेश में लगभग 4000 मेगावाट नई तापीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई है, जिससे राज्य की कुल क्षमता लगभग दोगुनी हो गई है। अब सरकार इस क्षमता को तीन गुना करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान एनटीपीसी के साथ इस परियोजना को लेकर समझौता किया गया था। अब मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद यह परियोजना धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना से प्रदेश में उद्योगों, किसानों, व्यापारियों और आम जनता को सस्ती, पर्याप्त और निर्बाध बिजली उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
एके शर्मा ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या के आधार पर ही नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षमता और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी देश में अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि हर घर, हर गांव और हर उद्योग तक गुणवत्तापूर्ण बिजली सुनिश्चित की जाए।





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