अपराध
28 Apr, 2026

मुख्तार मलिक हत्याकांड में 11 को उम्रकैद, गैंगस्टर का लंबा आपराधिक सफर खत्म

झालावाड़ में मुख्तार मलिक हत्याकांड में अदालत ने 11 आरोपियों को उम्रकैद, दो को बरी और एक को पांच साल की सजा सुनाते हुए मामले का बड़ा फैसला सुनाया।

झालावाड़, 28 अप्रैल

बहुचर्चित गैंगस्टर मुख्तार मलिक हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 11 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया, जबकि एक अन्य आरोपी को पांच वर्ष का कारावास दिया गया है। यह वारदात 31 मई 2022 की है, जब भीमसागर डैम के पास घात लगाकर मुख्तार मलिक पर अंधाधुंध गोलीबारी की गई थी, जिसमें उसकी मृत्यु हो गई थी।

मुख्तार मलिक लगभग चार दशक तक अपराध की दुनिया में सक्रिय रहा और उसके खिलाफ भोपाल व रायसेन जिलों में करीब 58 गंभीर मामले दर्ज थे। उसका जन्म करीब 1961 में हुआ और मूल रूप से वह उत्तर प्रदेश के फतेहपुर का निवासी था।

1982 में 21 वर्ष की उम्र में दुष्कर्म के मामले में पहली बार जेल जाने के बाद उसका अपराध जगत में प्रवेश हुआ, जिसके बाद वह हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, फिरौती के लिए अपहरण, आर्म्स एक्ट और अवैध वसूली जैसे मामलों में लगातार शामिल रहा।

1995 में भोपाल कोर्ट परिसर में हुई गैंगवार की घटना ने उसे सुर्खियों में ला दिया, जिसमें दिनदहाड़े फायरिंग हुई थी। हालांकि बाद में वह साक्ष्य के अभाव में बरी हो गया। 1996 में तीन बच्चों के अपहरण का मामला भी सामने आया, जिन्हें पुलिस मुठभेड़ के बाद सुरक्षित छुड़ाया गया। उस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री को धमकी देने और वरिष्ठ अधिकारी पर हमले के आरोप भी लगे।

2007 में एक मामले में उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी, हालांकि बाद में उसकी कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं रही और वह सक्रिय बना रहा।

मुख्तार मलिक कई बार गिरफ्तार हुआ, जिनमें 2012, 2014 और 2020 प्रमुख हैं। 2020 में उसे रायसेन जिले के गौहरगंज क्षेत्र से पकड़ा गया था, लेकिन बाद में जमानत पर रिहा हो गया। उसका गैंग भोपाल के तलाईया, शाहजहांनाबाद, एमपी नगर, जहांगीराबाद, मिसरोड और बिलखिरिया क्षेत्रों में सक्रिय था और वह अन्य राज्यों के अपराधियों को भी अपने नेटवर्क में जोड़ता था।

मई-जून 2022 में झालावाड़ क्षेत्र में गैंगवार के दौरान वह घायल हुआ और बाद में जंगल में भटकने के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस के अनुसार डिहाइड्रेशन उसकी मौत का कारण बना।

उसके बेटे यासीन मलिक का नाम भी अपराध जगत में सामने आया, जिसने पिता की मौत के बाद पुलिस को चुनौती दी और उसके खिलाफ भी कई मामले दर्ज हुए। लगभग 40 वर्षों तक चला मुख्तार मलिक का आपराधिक जीवन अंततः हिंसक परिस्थितियों में समाप्त हुआ और अब अदालत के फैसले ने इस हत्याकांड में दोषियों को सजा देकर कानून के कठोर रुख को स्पष्ट किया है।

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