भोपाल, 04 मई।
मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक मानवीय और मूल्य आधारित बनाने की दिशा में राज्य आनंद संस्थान ने नई पहल की शुरुआत की है। इसके अंतर्गत प्रदेश के शासकीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए छह दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है, जिसमें 2160 शिक्षक शामिल होंगे।
इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 18 कार्यशालाएँ प्रस्तावित हैं, जिनमें सभी जिलों से चयनित शिक्षक भागीदारी कर रहे हैं। प्रशिक्षण का शुभारंभ वाल्मी, ईटीसी सेंटर नीलबड़ और राज्य आनंद संस्थान में मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर कहा गया कि आनंद सभा के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि यह पहल शिक्षा प्रणाली में सांस्कृतिक परिवर्तन का प्रयास है, जिसमें शिक्षक स्वयं मूल्यों को आत्मसात कर विद्यार्थियों तक प्रभावी रूप से पहुंचाएंगे। इसे मूल्य आधारित शिक्षा की दिशा में एक सतत और महत्वाकांक्षी प्रयास बताया गया।
संस्थान के निदेशक ने कहा कि आनंद सभा विद्यार्थियों के समग्र विकास और आंतरिक आनंद का माध्यम है, जो उन्हें आत्मविश्वास, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना से जोड़ती है। यह पहल केवल शिक्षा का विस्तार नहीं बल्कि जीवन मूल्यों की ओर एक यात्रा है।
प्रशिक्षण में संवाद सत्र, समूह चर्चा, गतिविधियाँ और सकारात्मक संवाद तकनीकें शामिल की गई हैं। इसके माध्यम से शिक्षकों को विद्यालयों में आनंद सभा संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक कार्यशाला छह दिवसीय आवासीय होगी।
आनंद सभा के अंतर्गत विद्यार्थी केवल शैक्षणिक विषय नहीं सीखते, बल्कि जीवन कौशल और मानवीय मूल्यों को अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से समझते हैं। इसमें संवाद, सहयोग, क्षमा, कृतज्ञता, संकल्प शक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषय शामिल हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाना है।
कार्यशाला में स्वयं और शरीर के अंतर, संबंधों में संवेदनशीलता, क्षमा, कृतज्ञता और सकारात्मक सोच जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों के व्यवहार और जीवन दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन आ सके।



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