भोपाल, 04 मई।
मध्यप्रदेश में मानव तस्करी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक नवजात बच्ची को एक लाख रुपये में बेच दिए जाने का खुलासा हुआ है। श्योपुर पुलिस ने इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक महिला आरोपी अभी फरार बताई जा रही है।
यह मामला 18 अप्रैल को तब सामने आया जब मानपुर थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे-552 पर सोईकलां के पास दांतरदा बैरियर के समीप लगभग दो वर्षीय बालिका संदिग्ध और लावारिस स्थिति में मिली। मासूम बच्ची के इस तरह मिलने से पुलिस सतर्क हो गई और जांच शुरू कर दी गई।
जांच में सामने आया कि बच्ची का जन्म वर्ष 2024 में हुआ था और कुछ ही दिनों बाद उसे उसकी जैविक मां से अलग कर दिया गया था। इसके बाद उसे एक संगठित तस्करी नेटवर्क के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक बेचा जाता रहा।
पुलिस के अनुसार धार की एक महिला और खरगोन की एक अन्य महिला ने बच्ची को इंदौर की एक ब्यूटी पार्लर संचालिका तक पहुंचाया, जहां से आगे यह सौदा राजगढ़ निवासी दंपती तक पहुंचा। इस पूरी प्रक्रिया में बच्ची को एक लाख रुपये में बेचा गया।
बताया गया कि आरोपी दंपती ने बच्ची को लगभग दो वर्ष तक अपने पास रखा, लेकिन बाद में उसे श्योपुर के एक सुनसान इलाके में छोड़कर फरार हो गए। इसी घटना के बाद पूरा मामला उजागर हुआ।
पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ीं और अलग-अलग जिलों में कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इस मामले में एक महिला आरोपी की भूमिका सबसे अहम बताई जा रही है, जिसने बच्ची को उसकी मां से अलग कराने और सौदे की शुरुआत करने में मुख्य भूमिका निभाई, लेकिन वह अभी फरार है और उसकी तलाश जारी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्ची की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही जन्म रिकॉर्ड, अस्पतालों और क्लीनिकों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह गिरोह कब से सक्रिय था और क्या इससे पहले भी बच्चों की खरीद-फरोख्त की घटनाएं हुई हैं।




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