मुंबई, 13 अप्रैल।
दिग्गज पार्श्वगायिका आशा भोसले का अंतिम संस्कार आज मुंबई के शिवाजी पार्क में शाम 4 बजे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनका निधन कल मुंबई के एक अस्पताल में 92 वर्ष की आयु में हो गया था। सांस संबंधी संक्रमण और थकान के चलते उन्हें शनिवार शाम ब्रिच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आज सुबह 11 बजे लोअर परेल स्थित उनके निवास कासा ग्रांडे में अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर रखा गया, जहां लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
आठ दशकों से अधिक लंबे संगीत करियर में आशा भोसले ने हिंदी फिल्म संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। शुरुआती वर्षों में उन्होंने अनेक छोटे और कम चर्चित फिल्मों के लिए अधिकतर गीत गाए, लेकिन बाद में अपनी प्रतिभा से संगीत जगत में अलग पहचान बनाई। संगीतकार ओ. पी. नय्यर के साथ उनके सहयोग को बड़ा ब्रेक माना जाता है, जिसमें ‘तुमसा नहीं देखा’ और ‘नया दौर’ जैसे गीत शामिल हैं।
इसके बाद उन्होंने कई संगीत निर्देशकों के साथ सफलतापूर्वक काम किया और 1960 के दशक के अंत तक वह और लता मंगेशकर हिंदी सिनेमा संगीत की प्रमुख आवाजों के रूप में स्थापित हो गईं। हालांकि उन्हें लंबे समय तक अधिकतर भावनात्मक और शैलीगत रूप से सीमित गीतों तक ही देखा गया।
1970 के दशक में आर. डी. बर्मन के साथ उनका सहयोग ऐतिहासिक साबित हुआ, जिसने उन्हें आधुनिक और लोकप्रिय संगीत में नई पहचान दिलाई। इस दौर में उन्होंने कई यादगार गीत दिए, हालांकि उन्हें एक बार फिर पश्चिमी शैली के गीतों तक सीमित कर दिया गया।
संगीतकार खय्याम के साथ फिल्म ‘उमराव जान’ में उनके गीतों ने उनकी गायकी के एक नए और शास्त्रीय पक्ष को सामने लाया, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। बाद के वर्षों में उन्होंने ए. आर. रहमान के साथ भी सफल सहयोग किया और ‘रंगीला’ व ‘लगान’ जैसी फिल्मों में हिट गीत दिए।
अपनी बहुआयामी गायकी, विविध शैलियों और भाषाओं में सहजता के कारण आशा भोसले को भारतीय संगीत जगत की सबसे बहुमुखी गायिकाओं में से एक माना जाता है।


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