ढाका, 06 मई।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद बांग्लादेश में संभावित सीमा संबंधी घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। बांग्लादेश सरकार को आशंका है कि आने वाले समय में लोगों को भारत से वापस भेजे जाने की स्थिति बन सकती है, जिस पर उसने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत की ओर से किसी को भी जबरन सीमा पार नहीं कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे ऐसे किसी भी कदम के पक्ष में नहीं हैं, जिसमें किसी व्यक्ति को अवैध प्रवासी बताकर बांग्लादेश की सीमा में धकेला जाए। इसी कारण सीमा सुरक्षा बल को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे पहले भी बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने संकेत दिया था कि यदि इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं तो देश की ओर से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। पुशबैक शब्द का उपयोग उन मामलों के लिए किया जाता है, जब किसी व्यक्ति को बिना प्रक्रिया के जबरन सीमा पार भेज दिया जाता है। पिछले वर्षों में भारत-बांग्लादेश सीमा पर ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।
बंगाल चुनाव के दौरान भाजपा ने राज्य सरकार पर यह आरोप लगाया था कि अवैध रूप से आए लोगों को शरण दी गई है, जिसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। चुनाव परिणामों के बाद अब इसका असर दोनों देशों के बीच चर्चा में देखा जा रहा है।
इधर बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने भाजपा को चुनाव जीतने पर बधाई दी है और उम्मीद जताई है कि इससे दोनों देशों के संबंधों में सुधार हो सकता है। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों और तीस्ता जल बंटवारे जैसे मामलों पर पहले की तुलना में सकारात्मक प्रगति की संभावना बढ़ सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव का प्रभाव भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर पड़ता है, क्योंकि दोनों देशों के बीच सबसे लंबी सीमा इसी राज्य से जुड़ी हुई है। ऐसे में वहां की राजनीतिक स्थिति द्विपक्षीय संबंधों में अहम भूमिका निभाती है।









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