कोलकाता, 21 अप्रैल।
बेलडांगा हिंसा मामले की सुनवाई से कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अरिजीत बंद्योपाध्याय और न्यायमूर्ति अपूर्व सिंह राय की खंडपीठ ने स्वयं को अलग कर लिया है, जिसके बाद मामला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल के पास भेज दिया गया है। मंगलवार को न्यायमूर्ति बंद्योपाध्याय ने स्पष्ट किया कि इस मामले में गैरकानूनी गतिविधि निरोधक कानून की धारा 15 लागू होगी या नहीं, इसका निर्णय मुख्य न्यायाधीश ही करेंगे, इसलिए यह पीठ आगे सुनवाई नहीं करेगी।
मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हुई हिंसा के आरोपियों को दी गई जमानत रद्द करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी सोमवार को हाईकोर्ट पहुंची थी। एजेंसी ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर यह जांच की जा रही है कि मामले में यूएपीए की धारा 15 लागू होती है या नहीं। साथ ही यह भी कहा गया कि जांच पूरी होने से पहले ही निचली अदालत ने 15 आरोपियों को जमानत दे दी, इसलिए उनकी जमानत रद्द की जाए।
मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई हुई। इससे पहले सोमवार को खंडपीठ ने कहा था कि यदि एनआईए उचित कारण प्रस्तुत करती है तो जमानत रद्द की जा सकती है।
इस मामले से जुड़ी एक जनहित याचिका भी हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी, जिसे शुभेंदु अधिकारी ने दायर किया था। उस पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा था कि केंद्र सरकार चाहे तो जांच एनआईए को सौंप सकती है और राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बलों की मांग कर सकती है।
इस आदेश को राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जहां यह कहा गया कि जांच पहले ही एनआईए को सौंपी जा चुकी है और प्राथमिकी दर्ज है। हालांकि धारा 15 लागू होगी या नहीं, इस पर तत्काल कोई राय नहीं दी गई। सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि एनआईए अपनी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में बंद लिफाफे में प्रस्तुत करे, लेकिन अब तक यह रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई है।
बेलडांगा में जनवरी में एक प्रवासी श्रमिक की मौत के बाद तनाव फैल गया था, जिसके बाद कई चरणों में हिंसा, तोड़फोड़, रेल अवरोध, राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रदर्शन और पत्रकारों से झड़प की घटनाएं हुई थीं। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था और बाद में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 35 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मामला एनआईए को सौंप दिया गया था।










