नई दिल्ली, 07 मई।
भारत और वियतनाम के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह और वियतनाम के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री वू हाई क्वान ने भाग लिया, जिसमें दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने पर सहमति बनी। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डीप-टेक, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में संयुक्त सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत और वियतनाम के संबंध ऐतिहासिक रूप से गहरे रहे हैं और अब इन्हें विज्ञान, तकनीक और नवाचार के माध्यम से और अधिक मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने स्टार्टअप, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि इससे युवा उद्यमियों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही उन्होंने वियतनाम को भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण का अहम भागीदार बताया तथा भारत-आसियान विज्ञान एवं तकनीकी सहयोग को भविष्य के लिए मजबूत आधार करार दिया।
बैठक में भारत-आसियान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण फेलोशिप कार्यक्रम में वियतनाम की भागीदारी की सराहना की गई, जिसके तहत अब तक कई वियतनामी शोधकर्ता लाभान्वित हो चुके हैं और विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाएँ जारी हैं। वियतनाम के मंत्री वू हाई क्वान ने डीप-टेक क्षेत्र में सामाजिक उपयोगिता आधारित सहयोग को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई और दोनों देशों के बीच नियमित समन्वय के लिए विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का सुझाव दिया।
इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन, साइबर सुरक्षा ढांचे, नवाचार तंत्र और तकनीक हस्तांतरण जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने अनुसंधान संस्थानों, नवाचार केंद्रों और तकनीकी इन्क्यूबेशन प्लेटफॉर्म्स के बीच सहयोग की समीक्षा करते हुए स्टार्टअप एक्सचेंज, सह-नवाचार केंद्र और उद्योग आधारित अनुसंधान साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।



.jpg)

.jpg)





