भुवनेश्वर, 07 मई।
भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने बुधवार को ओडिशा के उपमुख्यमंत्री तथा कृषि एवं किसान सशक्तिकरण एवं ऊर्जा मंत्री कनक वर्धन सिंह देव से मुलाकात कर व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को लेकर विस्तार से चर्चा की। लोक सेवा भवन में आयोजित इस बैठक में दोनों पक्षों ने ओडिशा को वैश्विक निवेश और औद्योगिक साझेदारी के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।
बैठक में ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विशाल कुमार देव और वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव एवं ओपीटीसीएल के सीएमडी भास्कर ज्योति शर्मा भी मौजूद रहे। चर्चा के दौरान कृषि निर्यात, तकनीकी सहयोग, खनिज आधारित उद्योग और द्विपक्षीय व्यापार जैसे विषय प्रमुख रहे।
उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने ओडिशा की खनिज संपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में देश के करीब 92 प्रतिशत क्रोमाइट भंडार मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि तटीय क्षेत्रों में रेयर अर्थ मिनरल्स के बड़े भंडार भी उपलब्ध हैं, जिससे खनन और मूल्य संवर्धन आधारित उद्योगों में विदेशी निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं।
कनाडाई प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से ओडिशा के ऑटोमोबाइल क्षेत्र और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश को लेकर रुचि दिखाई। दोनों पक्षों ने सतत औद्योगिक विकास के लिए तकनीकी साझेदारी और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई।
बैठक के दौरान सिंह देव ने राज्य की सांस्कृतिक विरासत, कृषि परिदृश्य और औद्योगिक विकास मॉडल की जानकारी भी साझा की। उन्होंने कहा कि ओडिशा परंपरा और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ रहा है और राज्य समावेशी व सतत विकास आधारित वैश्विक साझेदारियों का स्वागत करता है।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि विश्व बैंक की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रिपोर्ट में ओडिशा को ‘अचीवर स्टेट’ का दर्जा मिला है। मजबूत आधारभूत संरचना और उद्योग-अनुकूल नीतियों के कारण राज्य वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि देश में प्रस्तावित तीन ग्रीन हाइड्रोजन हब में से दो पारादीप और गोपालपुर में स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं से ओडिशा हरित ऊर्जा और डीकार्बोनाइजेशन के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा। कनाडा ने भी स्वच्छ ऊर्जा और औद्योगिक सहयोग से जुड़ी परियोजनाओं में निवेश की इच्छा जताई है।
बैठक के अंत में दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और संस्थागत संवाद को आगे जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।



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