नई दिल्ली, 07 मई।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की प्रमुख योजना प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) देशभर में स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग के माध्यम से संचालित इस योजना के तहत लाखों लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिले हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार योजना के माध्यम से अब तक करीब 36.33 लाख लोगों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया गया है। पीएमईजीपी का उद्देश्य कृषि क्षेत्र से इतर नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने वाले युवाओं और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को बैंक ऋण पर मार्जिन मनी सब्सिडी उपलब्ध कराना है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को मजबूती मिली है।
15वें वित्त आयोग की अवधि यानी वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान योजना का प्रदर्शन काफी प्रभावी रहा है। इस अवधि में 13,554.42 करोड़ रुपये के स्वीकृत बजट का पूर्ण उपयोग किया गया और 4.03 लाख से अधिक सूक्ष्म उद्यम स्थापित किए गए। यह निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपलब्धि मानी जा रही है।
योजना के तहत महिलाओं और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। कुल लाभार्थियों में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं, जबकि वितरित मार्जिन मनी सब्सिडी का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा महिला उद्यमियों को मिला है। इसके अलावा लगभग 54 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने में भी योजना की बड़ी भूमिका रही है। पीएमईजीपी के तहत स्थापित करीब 80 प्रतिशत उद्यम ग्रामीण इलाकों में संचालित हो रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बल मिला है।
सरकार का मानना है कि पीएमईजीपी आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने के साथ जमीनी स्तर पर आर्थिक विकास और स्वरोजगार को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा रही है।





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