जोधपुर 08 मई।
राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया कि सर्वेयर द्वारा नुकसान का मूल्यांकन किए जाने के बाद बीमा कंपनी द्वारा केवल दस्तावेजों की कमी का हवाला देकर दावा खारिज करना उचित नहीं माना जा सकता। आयोग ने बीमा कंपनी की अपील का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया।
न्यायिक सदस्य उर्मिला वर्मा और सदस्य लियाकत अली की पीठ ने बीमा कंपनी द्वारा बैंक को पक्षकार नहीं बनाए जाने के आधार पर परिवाद खारिज करने की मांग को भी अस्वीकार कर दिया। आयोग ने कहा कि यह आपत्ति पहले जिला आयोग के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई थी, इसलिए इसे अपील स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही बीमा कंपनी को दावा राशि 13 लाख 95 हजार 634 रुपए, उस पर 9 प्रतिशत ब्याज तथा 10 हजार रुपए परिवाद व्यय के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया गया।
बीमा कंपनी की ओर से दायर अपील में कहा गया था कि दावेदार ने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए, इसलिए दावा सही रूप से खारिज किया गया। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि एसबीआई से ऋण लेने के कारण बैंक को आवश्यक पक्षकार बनाया जाना चाहिए था, लेकिन उसे परिवाद में शामिल नहीं किया गया, जिससे जिला आयोग का निर्णय गलत है।
परिवादी पक्ष की ओर से यह कहा गया कि बैंक को पक्षकार नहीं बनाए जाने की आपत्ति जिला आयोग में नहीं उठाई गई थी, इसलिए इसे बाद में आधार नहीं बनाया जा सकता। यह भी दलील दी गई कि जब बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने नुकसान का आकलन कर लिया, तो केवल दस्तावेजों के अभाव में दावा खारिज करना अनुचित व्यापार व्यवहार है। जिला आयोग द्वारा परिवाद स्वीकार करना उचित बताया गया।
राज्य उपभोक्ता आयोग ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह समझ से परे है कि यदि दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे तो सर्वेयर ने नुकसान का आकलन किस आधार पर किया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी यह साबित करने में असफल रही कि परिवादी ने बिना नुकसान के झूठा दावा प्रस्तुत किया था।
आयोग ने यह निष्कर्ष दिया कि जब नुकसान का आकलन हो चुका हो, तब दस्तावेजों की कमी के आधार पर दावा खारिज करना गलत और अनुचित है। इसके साथ ही बैंक को पक्षकार न बनाए जाने की दलील को भी खारिज करते हुए कहा गया कि यह आपत्ति पहले नहीं उठाई गई थी। अंततः आयोग ने बीमा कंपनी को निर्धारित राशि ब्याज सहित और परिवाद व्यय सहित अदा करने का आदेश दिया।



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