मुजफ्फरपुर, 11 मई
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में मानवता और सामाजिक सोच पर सवाल खड़े करने वाली एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां पंचायत के एक विवादित फरमान के बाद एक जीवित युवती का उसके ही परिवार द्वारा हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार प्रतीकात्मक दाह संस्कार कर दिया गया। यह मामला जियन खुर्द गांव का बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार करीब एक माह पहले गांव की एक युवती अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई थी। इस घटना के बाद परिजनों ने करजा थाने में मामला दर्ज कराया था, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए युवती को बरामद कर अदालत में पेश किया। अदालत में युवती ने स्वयं को बालिग बताते हुए अपने प्रेमी के साथ विवाह करने की बात स्वीकार की और उसके साथ रहने की इच्छा जताई। साथ ही उसने अपने परिजनों पर प्रताड़ना के आरोप भी लगाए।
अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने युवती को उसकी इच्छा के अनुसार उसके ससुराल भेज दिया। इसके बाद गांव और परिवार में विवाद गहरा गया और परिजनों को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा।
इसी सामाजिक दबाव के बीच पंचायत ने एक कठोर और विवादित निर्णय सुनाया, जिसमें कहा गया कि परिवार को समाज में वापस तभी स्वीकार किया जाएगा जब वे अपनी बेटी को मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दें।
स्थानीय मुखिया ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सामाजिक बहिष्कार से बचने के लिए परिवार ने पंचायत के फरमान को मानते हुए यह कदम उठाया। इस दौरान परिजनों ने अपनी ही जीवित बेटी का प्रतीकात्मक दाह संस्कार कर दिया।
थाना पुलिस ने बताया कि युवती का बयान पहले ही दर्ज किया जा चुका था और वह बालिग होने के कारण अपनी मर्जी से ससुराल भेजी गई थी। अब यह जांच की जा रही है कि क्या इस पूरे मामले में किसी तरह का दबाव या मजबूरी शामिल थी।
यह घटना समाज में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और परंपरागत सोच के टकराव को उजागर करती है, जहां कानून द्वारा दिए गए अधिकारों के बावजूद सामाजिक दबाव कई बार गंभीर स्थिति उत्पन्न कर देता है।












