अयोध्या, 08 अप्रैल 2026।
रामायण से जुड़ी पवित्र नगरी अयोध्या में अब प्राचीन धार्मिक विरासत को नए स्वरूप में संवारने की दिशा में व्यापक योजना तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर रामायण कालीन 41 पौराणिक तीर्थ स्थलों के संरक्षण और कायाकल्प का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे इन स्थलों को फिर से उनके मूल स्वरूप में विकसित किया जा सके।
इस योजना के तहत 84 कोसी परिक्रमा क्षेत्र का समग्र विकास किया जाएगा, जिसमें अयोध्या, गोंडा, बस्ती और अंबेडकरनगर जिलों के प्रमुख धार्मिक स्थलों को आपस में जोड़ा जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि श्रद्धालु इन स्थानों पर पहुंचकर प्राचीन काल की अनुभूति कर सकें और उन्हें आधुनिक सुविधाओं के साथ सहज दर्शन का लाभ मिल सके।
अधिकारियों के अनुसार, सर्वेक्षण का कार्य पूरा कर लिया गया है और अब चयनित स्थलों के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इन तीर्थों पर कुंडों का सौंदर्यीकरण, शेड, चेंजिंग रूम, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सहित अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही, पहुंच मार्गों को मजबूत कर आवागमन को आसान बनाया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 14 प्रमुख कुंडों के विकास का कार्य मनरेगा के माध्यम से शुरू किया गया है।
इस परियोजना में अंगी ऋषि आश्रम, वाल्मीकि आश्रम, विभीषण कुंड, सुग्रीव कुंड, राम कुंड, सीता कुंड, दुग्धेश्वर कुंड, भैरव कुंड, तमसा नदी सहित कई महत्वपूर्ण स्थल शामिल हैं, जिन्हें पौराणिक स्वरूप में विकसित करने के लिए विशेषज्ञों की सलाह ली जा रही है।
तीर्थों के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
84 कोसी परिक्रमा मार्ग के विकसित होने से श्रद्धालुओं को एक साथ कई पवित्र स्थलों के दर्शन का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सीसीटीवी निगरानी और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी की जाएगी।
यह पहल अयोध्या को एक व्यापक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे रामायण काल की विरासत आधुनिक स्वरूप में जीवंत हो सकेगी।













