गाजियाबाद, 12 मई।
देश में दवा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय फार्माकोपिया आयोग ने महत्वपूर्ण पहल की है। आयोग ने मंगलवार को बिहार, महाराष्ट्र और मिजोरम राज्य फार्मेसी परिषदों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
गाजियाबाद स्थित मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान यह समझौता भारतीय फार्माकोपिया आयोग के सचिव एवं वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेलवन और संबंधित राज्य फार्मेसी परिषदों के पदाधिकारियों के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर विभिन्न संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
इस सहयोग का उद्देश्य पंजीकृत फार्मासिस्टों के बीच राष्ट्रीय औषध सूची के उपयोग और स्वीकार्यता को बढ़ाना है, ताकि दवाओं का सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक आधार पर इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही सहभागी राज्यों के अस्पतालों में इसे एक अनिवार्य संदर्भ दस्तावेज के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
समझौते के तहत भारतीय फार्माकोपिया आयोग और राज्य फार्मेसी परिषदें मिलकर फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम को मजबूत करेंगी। इसके लिए दवाओं के दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग को बढ़ावा दिया जाएगा और प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया निगरानी केंद्रों की स्थापना में सहयोग किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार इस पहल से दवा सुरक्षा निगरानी प्रणाली अधिक मजबूत होगी और फार्मासिस्टों व स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ेगी। इसके साथ ही दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग, फार्माकोविजिलेंस और औषध मानकों से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और सतत शिक्षा अभियान भी संचालित किए जाएंगे।
समझौते में दवा सुरक्षा, नियामक मानकों और औषध उपचार से जुड़े शोध तथा पेशेवर सहयोग को बढ़ावा देने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाकर दवा और मरीज सुरक्षा के प्रति समझ बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में नीति आयोग के पूर्व सदस्य, उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार और विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के वरिष्ठ विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।









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