नई दिल्ली, 25 अप्रैल।
दिल्ली विश्वविद्यालय के रामानुजन कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर रसाल सिंह के निलंबन को दिल्ली उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है। यह निर्णय जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव की पीठ द्वारा सुनाया गया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रोफेसर को उचित और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच पूरी होने से पहले ही निलंबित कर दिया गया था। उनके खिलाफ की गई कार्रवाई एक तदर्थ समिति की रिपोर्ट पर आधारित थी, न कि पोक्सो/कार्यस्थल यौन उत्पीड़न कानून (POSH Act) के तहत गठित आंतरिक समिति की जांच के निष्कर्षों पर।
मामला तब सामने आया जब रामानुजन कॉलेज के तीन सहायक प्रोफेसरों ने प्रोफेसर रसाल सिंह पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित कर जांच शुरू कराई थी।
कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सितंबर 2025 में कॉलेज प्रशासन ने उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश को प्रोफेसर रसाल सिंह ने अदालत में चुनौती दी थी, जिस पर 26 सितंबर 2025 को उच्च न्यायालय ने अंतरिम रोक लगा दी थी।
अब अंतिम सुनवाई के बाद अदालत ने निलंबन आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।











