अजमेर, 25 अप्रैल।
पुष्कर के पवित्र सरोवर की स्वच्छता और उसकी बिगड़ती स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका पर शनिवार को सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट (पुष्कर) विमल कुमार व्यास की अदालत में सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने प्रशासन की अनुपस्थिति पर सख्त रुख अपनाया।
सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि न्यायालय की ओर से जारी नोटिस की विधिवत तामील के बावजूद जिला कलेक्टर अजमेर, अजमेर विकास प्राधिकरण के आयुक्त और उपखंड अधिकारी पुष्कर न तो स्वयं उपस्थित हुए और न ही किसी अधिवक्ता को भेजा गया। इस पर अदालत ने संबंधित पक्षों के विरुद्ध एकपक्षीय (एक्स-पार्टी) कार्रवाई के आदेश दिए।
सुनवाई में केवल नगर परिषद पुष्कर की ओर से अधिवक्ता उपस्थित रहे और उन्होंने पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्थल होने के बावजूद प्रशासनिक निकायों की लापरवाही चिंता का विषय है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल 2026 को निर्धारित की है। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति और सरोवर की स्थिति को लेकर हुई टिप्पणी के बाद संबंधित महकमों में हलचल देखी जा रही है।











