मुंबई, 05 मई।
महाराष्ट्र सरकार के 29 जनवरी 2026 के निर्णय के अनुसार कोंकण क्षेत्र में कोलीवाड़ा के सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसके तहत ठाणे में चेंदनी कोलीवाड़ा का सीमांकन भी प्रस्तावित है। हालांकि चेंदनी कोलीवाड़ा कोली जमात न्यास ने प्रशासन से आग्रह किया है कि मूल कोली समुदाय को विश्वास में लिए बिना यह प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।
अतिरिक्त जिलाधिकारी हरिश्चंद्र पाटिल को दिए गए निवेदन में यह सवाल उठाया गया है कि क्या विकास के नाम पर कोलीवाड़ा की मूल पहचान को प्रभावित किया जा सकता है। ट्रस्ट ने चिंता जताई है कि ठाणे महानगर क्षेत्र में चल रही अर्बन रिन्यूअल योजना, भूमिगत मेट्रो, रेलवे लाइन के समानांतर सड़क, कोस्टल रोड और पुल परियोजनाओं के कारण चेंदनी कोलीवाड़ा की मूल बस्ती पर असर पड़ सकता है।
इससे पहले ट्रांस हार्बर रेलवे परियोजना के कारण कई घर प्रभावित हो चुके हैं। लगातार बढ़ते शहरीकरण से कोली समुदाय के पारंपरिक मछली व्यवसाय और जीवनशैली पर भी संकट उत्पन्न हो रहा है। इसी कारण ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि सीमांकन के दौरान केवल भूमि ही नहीं, बल्कि जीवन पद्धति की सुरक्षा भी आवश्यक है।
प्रस्तावित सीमांकन में यह मांग रखी गई है कि विस्तारित गांव क्षेत्र, मछली पकड़ने के उपयोग वाले इलाके, मैंग्रोव क्षेत्र, सेज, नाव और जाल रखने की जगह, पारंपरिक व्यवसाय के मार्ग, आंतरिक सड़कें, खुली सामुदायिक भूमि तथा गांव के देवता और मंदिर परिसर को शामिल किया जाए।
चेंदनी कोलीवाड़ा को ठाणे की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। यहां कार्यरत सहकारी मत्स्य पालन समितियां न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था का सहारा हैं, बल्कि परंपरा और विरासत को भी संरक्षित करती हैं। इसलिए ट्रस्ट ने कहा है कि विकास योजनाओं में कोलीवाड़ा की पहचान और कोली समुदाय के अस्तित्व की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमरीश थानेकर, सीमांकन समिति के सदस्य सचिन ठाणेकर और आनंद कोली उपस्थित रहे।



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