दोहा, 25 मई ।
क्षेत्रीय तनावों के बीच ईरान और अमेरिका के बीच उच्च स्तरीय वार्ता का एक नया दौर सोमवार को कतर की राजधानी दोहा में शुरू हुआ। इस वार्ता में ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकर ग़ालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराकची शामिल हुए, जबकि दोनों पक्षों ने किसी त्वरित सफलता की संभावना को फिलहाल कमतर बताया है।
वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार से जुड़े मुद्दे बताए जा रहे हैं। ईरान के केंद्रीय बैंक प्रमुख अब्दोलनासिर हेमती भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, और बातचीत में ईरान की जब्त संपत्तियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठने की संभावना है।
दोनों पक्षों ने यह स्वीकार किया है कि कुछ प्रगति हुई है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अभी किसी अंतिम समझौते की स्थिति नहीं बनी है। ईरान ने कहा है कि अमेरिका के साथ कोई तात्कालिक समझौता संभव नहीं है, जबकि अमेरिकी पक्ष ने कहा है कि यदि समझौता हुआ तो वह “महत्वपूर्ण और सार्थक” होना चाहिए, अन्यथा कोई समझौता नहीं होगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वाशिंगटन पहले कूटनीति को पूरी तरह अवसर देगा, लेकिन यदि परिणाम नहीं निकला तो अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। वहीं ईरान ने वार्ता जारी रखने के लिए कतर में जब्त लगभग 12 अरब डॉलर की संपत्तियों की तत्काल रिहाई की मांग को एक प्रमुख शर्त बताया है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मध्यस्थता के जरिए कई क्षेत्रों में प्रगति हुई है, लेकिन अभी भी गंभीर मतभेद बने हुए हैं और अंतिम समझौता दूर है। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि किसी भी व्यापक समझौते के लिए क्षेत्रीय देशों को भी शामिल होना होगा, जिनमें कतर, मिस्र, जॉर्डन और तुर्किए का नाम लिया गया है।
इसी बीच क्षेत्रीय तनाव भी बना हुआ है। दक्षिणी लेबनान में इजराइल द्वारा नए निकासी आदेश जारी किए गए हैं, जिससे हिज़्बुल्लाह के साथ संघर्ष विराम की स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अमेरिकी मध्यस्थता से लागू अस्थायी युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है।








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