भोपाल, 16 अप्रैल
प्रदेश के ओंकारेश्वर में शुक्रवार से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सांस्कृतिक महाकुंभ ‘एकात्म पर्व’ का शुभारंभ करेंगे। यह पांच दिवसीय आयोजन आदि गुरु शंकराचार्य की दीक्षा स्थली पर मांधाता पर्वत की गुफाओं के बीच स्थित ‘एकात्म धाम’ में संपन्न होगा, जहां दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।
वैशाख शुक्ल पंचमी के शुभ अवसर पर होने वाले इस आयोजन में देश-विदेश के प्रमुख संत, मनीषी और विद्वान एकत्र होकर एकात्मता के वैश्विक संदेश को प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री इस दौरान अद्वैत लोक और अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे तथा वैदिक अनुष्ठानों में भी सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम में द्वारका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के सान्निध्य के साथ पद्मश्री निवेदिता भिड़े और स्वामी शारदानंद सरस्वती की उपस्थिति भी रहेगी।
इस महोत्सव के अंतर्गत ‘अद्वैतामृतम्-विमर्श सभा’ में अद्वैत दर्शन की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। पहले दिन विशेष रूप से ‘अद्वैत और जेन-जेड’ जैसे विषयों पर युवाओं के विचार सामने रखे जाएंगे, जबकि आगामी सत्रों में अद्वैत दर्शन का कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक शांति और सिख परंपरा के ‘एक ओंकार’ के साथ संबंधों पर चर्चा होगी। यह आयोजन आधुनिक समाज और युवा पीढ़ी को अद्वैत दर्शन की शाश्वत सोच से जोड़ने का प्रयास माना जा रहा है।
सांस्कृतिक संध्या ‘रसो वै सः’ में प्रतिदिन देश के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। पहले दिन जयतीर्थ मेवुंडी का शास्त्रीय गायन और शुभदा वराडकर की ओड़िसी प्रस्तुति ‘एकम्’ मुख्य आकर्षण रहेगी। आने वाले दिनों में भरतनाट्यम, कर्नाटक संगीत और निर्गुण वाणी के माध्यम से अद्वैत भावों की अभिव्यक्ति की जाएगी।
इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण 21 अप्रैल को होने वाला दीक्षा समारोह होगा, जिसमें देश-विदेश के 700 से अधिक युवा ‘शंकरदूत’ के रूप में संकल्प लेंगे। राज्य सरकार ओंकारेश्वर में ‘एकात्म धाम’ के माध्यम से आचार्य शंकर के दर्शन को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास कर रही है, जहां 108 फीट ऊंची एकात्मता की प्रतिमा और निर्माणाधीन अद्वैत लोक संग्रहालय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। यह पर्व देश को सांस्कृतिक और वैचारिक रूप से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







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