चंडीगढ़, 08 अप्रैल।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल को देशद्रोह के आरोप में जमानत प्रदान कर दी है। रामपाल पिछले 11 साल चार महीने से हिसार की केंद्रीय जेल में बंद थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनके समर्थकों ने राज्यभर में जश्र मनाया।
यह मामला पूर्व हुड्डा सरकार के दौरान सुर्खियों में रहा। 12 जुलाई 2006 को रोहतक के करौंथा आश्रम में रामपाल के अनुयायियों और आर्य समाज के बीच हुई झड़प में एक युवक की मौत हो गई थी। 14 जुलाई 2014 को रोहतक कोर्ट में इस मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिसार कोर्ट से की जानी थी, लेकिन उस दिन रामपाल के समर्थकों ने हिसार कोर्ट परिसर में तोड़फोड़ और वकीलों से झगड़ा किया।
रोहतक बार एसोसिएशन ने अदालत की अवमानना याचिका दाखिल की। रामपाल उस केस में दो बार पेश नहीं हुए, जिसके चलते 10 और 17 नवंबर 2014 को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए। 19 नवंबर 2014 को पुलिस ने आश्रम से उन्हें गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। 2018 में हिसार कोर्ट ने आश्रम में हुई मौतों के मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। रामपाल ने हिसार कोर्ट में जमानत याचिका दायर की, जिसे 22 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। रामपाल पर कुल 14 मामले थे, जिनमें से 11 में वे बरी हो चुके हैं। मुकदमा नंबर 429 और 430 में हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा को सस्पेंड किया था। देशद्रोह का मुकदमा नंबर 428 अभी भी चल रहा है, जिसमें लगभग 1000 लोग शामिल थे और ज्यादातर को जमानत मिल चुकी है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद संबंधित जिला अदालत को आदेश भेजा जाएगा। वहां जमानत बांड भरने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जेल प्रशासन को आदेश जारी किए जाएंगे, जिसके बाद रामपाल रिहा होंगे।
संत रामपाल दास हरियाणा के एक स्वयंभू आध्यात्मिक गुरु हैं और सतलोक आश्रम के संस्थापक हैं। वे कबीर पंथ की विचारधारा के अनुयायी हैं और खुद को कबीर साहेब का अवतार मानते हैं। रामपाल सिंह जतैन नाम के यह गुरु हरियाणा के सोनीपत जिले के धनाना गांव के निवासी हैं। 1990 के दशक में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ आध्यात्मिक मार्ग अपनाया और रामदेवानंद जी के शिष्य बने। उन्होंने हिसार (बरवाला), रोहतक और अन्य जगहों पर सतलोक आश्रम की स्थापना की, जहां वे कबीर साहेब की भक्ति का प्रचार करते हैं। रामपाल दहेज, नशा, छुआछूत और मूर्ति पूजा का विरोध करते हैं और सत्य साधना का संदेश देते हैं। उनके अनुयायी हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व उत्तराखंड में सक्रिय हैं। पिछले वर्ष से खाप पंचायतों द्वारा रामपाल की तस्वीर पर सम्मानित किया जा रहा है।


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