कोलकाता, 08 मई।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान दृष्टिहीन शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी में शामिल न होने पर निर्वाचन आयोग द्वारा शो-कॉज नोटिस जारी किए जाने के मामले पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए आयोग के रवैये की आलोचना की है। अदालत ने इस पूरे प्रकरण को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता बताई है।
मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग को इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए। अदालत में “ऑल बंगाल ब्लाइंड टीचर्स एसोसिएशन” की ओर से दलील दी गई कि चुनावी नियमों के तहत दृष्टिहीन शिक्षक प्रिसाइडिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी निभाने में सक्षम नहीं होते।
एसोसिएशन ने बताया कि इसके बावजूद हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में लगभग दो हजार दृष्टिहीन शिक्षकों को पोलिंग ड्यूटी पर लगाया गया था। ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर उनके खिलाफ शो-कॉज नोटिस जारी कर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई, जिसके बाद शिक्षकों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
अदालत ने निर्देश दिया कि एसोसिएशन चुनाव आयोग के समक्ष विस्तृत आवेदन प्रस्तुत करे और आयोग को 90 दिनों के भीतर इस पर निर्णय लेकर सूचना देने को कहा गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि आयोग के निर्णय से शिक्षक असंतुष्ट रहते हैं तो वे दोबारा न्यायालय में अपील कर सकते हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले भी कॉलेज प्रोफेसरों को चुनावी ड्यूटी में लगाए जाने के मामले में अदालत ने आयोग की आलोचना की थी। राज्य में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को संपन्न हुए थे तथा मतगणना 4 मई को हुई थी। चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बावजूद इस मुद्दे पर विवाद जारी है।



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