नई दिल्ली, 22 मई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को साझा किया कि मंत्रिपरिषद की हालिया बैठक का मुख्य केंद्र जन-कल्याण और प्रशासनिक सुधार रहा। उन्होंने बताया कि इस उच्चस्तरीय मंथन के दौरान जीवन को सरल बनाने और व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री के अनुसार, ये कदम ‘विकसित भारत’ के सामूहिक स्वप्न को धरातल पर उतारने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।
गुरुवार को सेवा तीर्थ में लगभग साढ़े चार घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में सरकार के भावी एजेंडे पर गहन विचार-विमर्श हुआ। बैठक में नौ प्रमुख मंत्रालयों ने अपने कामकाज का विस्तृत ब्योरा पेश किया, जिसके आधार पर पिछले दो वर्षों का लेखा-जोखा तैयार किया गया। प्रधानमंत्री ने सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और मंत्रालयों के बीच आपसी सामंजस्य को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
इस दौरान पश्चिम एशिया की बदलती वैश्विक परिस्थितियों और उनके आर्थिक प्रभावों पर भी व्यापक मंथन हुआ। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास की गति को और तेज करने के लिए भविष्य के रोडमैप को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। बैठक में प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने और नई कार्य-संस्कृतियों को अपनाने के लिए मंत्रियों के बीच बेहतरीन अनुभवों का आदान-प्रदान भी किया गया।






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