नई दिल्ली, 29 मई।
वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट (2025-26) जारी करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) ग्रोथ 6.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के वृहद आर्थिक आधार ठोस हैं। ऊंची ऊर्जा कीमतों और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में बाधाओं जैसी चुनौतियों के बीच कंपनियों और बैंकिंग क्षेत्र के मजबूत बही-खाते, साथ ही सरकार का पूंजीगत व्यय पर निरंतर जोर भारत की वृद्धि को सहारा दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू मांग और सक्रिय नीतिगत पहलों के दम पर भारत आर्थिक विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7.6 फीसदी की प्रभावशाली वृद्धि दर दर्ज की थी, जिससे यह प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में यह वृद्धि 7.1 फीसदी थी। आरबीआई ने कहा कि व्यापारिक साझेदारों के साथ किए गए समझौते आने वाले समय में विकास को और गति देंगे।
मुद्रास्फीति (महंगाई) पर आरबीआई ने स्पष्ट किया कि सरकार और केंद्रीय बैंक ने मिलकर 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक चार फीसदी का लक्ष्य (दो फीसदी घट-बढ़ के साथ) बरकरार रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्यान्न भंडार और जल स्तर की स्थिति संतोषजनक है, जो मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में सहायक होगी।
इसके अतिरिक्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई ने केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) के दायरे को बढ़ाने की योजना बनाई है। इसे डीबीटी (DBT) योजनाओं और खुदरा क्षेत्र में और अधिक विस्तारित किया जाएगा। साथ ही, वित्तीय परिसंपत्तियों के 'टोकनाइजेशन' के लिए नई पायलट परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।











