उलानबटार, 04 जून ।
मंगोलिया की राजधानी उलानबटार स्थित गंदंतेगचेनलिंग मठ में भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों अर्हत सारिपुत्र और अर्हत महामौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों के दर्शन और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
सुबह से ही स्थानीय बौद्ध अनुयायी और श्रद्धालु मठ परिसर में एकत्रित होकर इन पावन अवशेषों के दर्शन कर रहे हैं। पूरे परिसर में आध्यात्मिक श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना हुआ है। यह पवित्र अवशेष 9 जून तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ उपलब्ध रहेंगे।
भगवान बुद्ध के दोनों प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष भारत से 31 मई से 10 जून तक आयोजित दस दिवसीय प्रदर्शनी के लिए मंगोलिया ले जाए गए हैं। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर इन्हें विधिवत रूप से मठ में स्थापित किया गया।
"प्रकाश के पात्र" प्रदर्शनी का उद्घाटन लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और अतुल मल्हारी गोत्सुर्वे की उपस्थिति में किया गया।
पिछले वर्ष मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख की भारत यात्रा के दौरान नरेन्द्र मोदी ने इस प्रदर्शनी की घोषणा की थी।
इन पवित्र अवशेषों का मंगोलिया पहुंचना भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्ध विरासत से जुड़े संबंधों को और सशक्त करने वाला कदम माना जा रहा है।
बौद्ध परंपरा में अर्हत सारिपुत्र को ज्ञान का प्रतीक और अर्हत महामौद्गल्यायन को अलौकिक शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण बौद्ध समुदाय में इन अवशेषों के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व है।







.jpg)



