अपराध
05 Jun, 2026

फर्जी मेडिकल रजिस्ट्रेशन रैकेट में आरएमसी का अधिकारी गिरफ्तार

फर्जी एफएमजीई प्रमाण-पत्रों के आधार पर मेडिकल पंजीकरण कराने के मामले में एसओजी ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन वेरीफाइंग ऑफिसर को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की है।

जयपुर, 05 जून ।

फर्जी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) प्रमाण-पत्रों के जरिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने के चर्चित मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच के दौरान राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन वेरीफाइंग ऑफिसर एवं कनिष्ठ सहायक फरहान हसन उर्फ फरहान नकवी को गिरफ्तार किया गया है। उस पर रिश्वत लेकर दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना फर्जी प्रमाण-पत्रों के पक्ष में रिपोर्ट देने का आरोप है।

जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन भानाराम माली द्वारा किया जा रहा था। वह विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर लौटे उन अभ्यर्थियों से संपर्क करता था, जो भारत में चिकित्सा अभ्यास के लिए आवश्यक एफएमजीई परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सके थे। आरोप है कि उनके लिए कूटरचित प्रमाण-पत्र तैयार कराए जाते थे और इसके बदले प्रति अभ्यर्थी 20 से 30 लाख रुपये तक वसूले जाते थे।

जांच एजेंसी के अनुसार इस राशि में से प्रति मामले 2 से 5 लाख रुपये तत्कालीन वेरीफाइंग ऑफिसर को भी दिए जाते थे। वर्ष 2023-24 के दौरान पंजीकरण अनुभाग में तैनात रहे फरहान हसन का दायित्व विदेशी चिकित्सा शिक्षा प्राप्त अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का संबंधित संस्थानों और एजेंसियों से सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करना था। आरोप है कि उसने अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर बिना आवश्यक जांच के फर्जी दस्तावेजों को सही बताते हुए सकारात्मक रिपोर्ट भेज दी।

इसी आधार पर अपात्र अभ्यर्थियों को विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप और अस्थायी पंजीकरण का लाभ मिला। अपराध प्रमाणित होने पर एसओजी ने आरोपित को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर लिया गया है। मामले में उससे गहन पूछताछ की जा रही है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसके कार्यकाल के दौरान कितने फर्जी पंजीकरण हुए और इस पूरे रैकेट में काउंसिल के अन्य कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी शामिल थे। अधिकारियों को आने वाले दिनों में इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासों की उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण में 4 फरवरी 2026 को एसओजी थाने में मामला दर्ज किया गया था। अब तक की कार्रवाई में फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर पंजीकरण और इंटर्नशिप हासिल करने वाले 17 विदेशी स्नातक डॉक्टरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इसके अलावा तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, मुख्य आरोपित भानाराम माली और एक दलाल की भी गिरफ्तारी हो चुकी है।

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