आर्थिक अपराधों पर लगाम लगाने वाला विभाग, कार्रवाई से ज्यादा “मैनेजमेंट” में माहिर नजर आ रहा है। हाई प्रोफाइल केस में धूमधाम से जांच शुरू हुई—सबूत पक्के, गलती साफ। प्रेस नोट भी जारी—“कार्रवाई हो गई।” लेकिन असल में कार्रवाई फाइलों में ही घूम रही है। जमीनी हकीकत यह कि न अफसर को पता, न जांच अधिकारी को—कार्रवाई आखिर होगी कब? फिलहाल कागजों में न्याय हो चुका है।












