गोरखपुर, 17 फरवरी।
रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ. राजेंद्र सिंह, जिन्हें भारत में जलपुरुष कहा जाता है, ने कहा कि सनातन विकास मॉडल ही भारत को दोबारा विश्वगुरु बना सकता है। उनका मानना है कि विकास के साथ प्रकृति और पर्यावरण की चिंता करना भारत का मूल दर्शन है।
डॉ. सिंह ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के संयुक्त आयोजन में ‘विकास के साथ पर्यावरणीय चुनौतियां : साझा प्रयास से सतत विकास’ विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत का विकास सनातन था, यानी नित्य-नूतन निर्माण, जिसका कोई आरंभ या अंत नहीं। जल संकट को लेकर उन्होंने वाटर डिस्चार्ज और रिचार्ज में संतुलन बनाने पर जोर दिया और छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े परिणाम हासिल करने का अनुभव साझा किया, जिनसे उन्होंने 50 वर्षों में 23 नदियों को पुनर्जीवित किया।
संगोष्ठी में पूर्व मुख्य सचिव और स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। साथ ही, एमजीयूजी कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह ने कहा कि यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
अनिल कुमार ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सॉलिड वेस्ट और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट में यूपी की उपलब्धियों का उल्लेख किया। संगोष्ठी में अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। यूपीपीसीबी के चेयरमैन डॉ. रविंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह आयोजन मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जो विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देते हैं।
















