चार दिवसीय इस अंतरसत्रीय बैठक में केपी प्रतिभागियों, पर्यवेक्षकों, उद्योग से जुड़े हितधारकों तथा नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्राकृतिक हीरा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया। भारत की अध्यक्षता में अपनाए गए “विश्वसनीयता, अनुपालन और उपभोक्ता विश्वास” के त्रिस्तरीय विषय के अंतर्गत वैश्विक प्राकृतिक हीरा व्यापार में पारदर्शिता, बेहतर शासन व्यवस्था और परिचालन तंत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
समापन अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत हीरा कटाई और पॉलिशिंग का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र होने के साथ-साथ प्राकृतिक हीरों को विश्वास, जिम्मेदारी और साझा समृद्धि का प्रतीक बनाए रखने में किम्बर्ली प्रक्रिया की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान सभी हितधारकों के साथ मिलकर विश्वसनीयता, अनुपालन और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करने तथा तेजी से बदलते वैश्विक बाजार में इस प्रक्रिया की प्रासंगिकता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
किम्बर्ली प्रक्रिया प्रमाणन योजना, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के संकल्प 55/56, 2000 के तहत स्थापित की गई थी, एक वैश्विक पहल है जिसका उद्देश्य संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले हीरों को वैध व्यापार में प्रवेश से रोकना तथा प्राकृतिक हीरों की आपूर्ति श्रृंखला में जिम्मेदार स्रोतों को बढ़ावा देना है।
हीरा तराशने और पॉलिशिंग के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में भारत ने इस प्रक्रिया के उद्देश्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है और प्राकृतिक हीरा क्षेत्र में पारदर्शिता, स्थिरता तथा जिम्मेदार कार्यप्रणाली को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया है।




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