छत्तीसगढ़
15 May, 2026

भूमि संसाधन सचिव की मुख्य सचिव से भेंट, छत्तीसगढ़ के राजस्व व सिंचाई कार्यों की समीक्षा

मंत्रालय महानदी भवन में भूमि संसाधन सचिव ने मुख्य सचिव से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में राजस्व, जलग्रहण, सिंचाई और ई-गवर्नेंस से जुड़े नवाचारों एवं योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की।

रायपुर, 15 मई।

मंत्रालय महानदी भवन में भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने मुख्य सचिव विकासशील से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ में जलग्रहण प्रबंधन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, पंजीयन एवं स्टाम्प, भुईयां पोर्टल तथा राजस्व विभाग में चल रहे सुशासन आधारित नवाचारों की जानकारी प्राप्त की।

बैठक के दौरान उन्होंने राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर, पंजीयन एवं स्टाम्प तथा छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के कार्यों और प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की वर्तमान स्थिति और तकनीकी सुधारों की जानकारी प्रस्तुत की।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने बताया कि राज्य में भू-अभिलेखों का पूर्ण कम्प्यूटरीकरण कर दिया गया है तथा आधुनिक रिकॉर्ड रूम स्थापित किए गए हैं। भू-नक्शों का डिजिटलीकरण कर दिया गया है और रेवेन्यू ई-कोर्ट प्रणाली के माध्यम से राजस्व प्रकरणों का ऑनलाइन निराकरण किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि भुईयां पोर्टल के माध्यम से डिजिटल किसान किताब को नियमित रूप से अपडेट किया जा रहा है तथा कोई भी भूमि स्वामी अपनी भूमि की जानकारी ऑनलाइन डाउनलोड कर सकता है। इसके साथ ही भूमि का ऑटो डायवर्सन भी डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है।

पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग की ओर से बताया गया कि ई-पंजीयन प्रणाली के माध्यम से दस्तावेजों की रजिस्ट्री को पूरी तरह पेपरलेस और पारदर्शी बनाया गया है तथा सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन उप पंजीयक को प्रस्तुत की जा रही हैं। क्रेता-विक्रेता को व्हाट्सएप अलर्ट के माध्यम से अपॉइंटमेंट से लेकर रजिस्ट्री तक की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है और रजिस्ट्री की प्रति भी डिजिटल रूप से प्राप्त की जा सकती है।

जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के अनुसार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वर्ष 2021-22 में 45 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें 27 जिलों के 43 विकासखंडों में 387 माइक्रो वाटरशेड शामिल हैं। इनका कुल उपचारित क्षेत्र 2.50 लाख हेक्टेयर है तथा परियोजना लागत 613.66 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। परियोजना का केंद्र एवं राज्यांश अनुपात 60:40 है और इसकी अवधि 2021-22 से 2025-26 तक निर्धारित है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया है।

बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने विभागीय कार्यों की प्रगति और तकनीकी सुधारों पर विस्तार से चर्चा की

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