सेशेल्स के सिविल सेवकों के लिए सुशासन, नीति निर्माण, तकनीकी नवाचार और न्यायिक सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम मसूरी स्थित राष्ट्रीय सुशासन केंद्र में आयोजित किया गया। इस क्षमता निर्माण कार्यक्रम में कुल 29 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिनमें रक्षा, वित्त, शिक्षा, न्यायपालिका और राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़े अधिकारी भी सम्मिलित हैं।
केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अनुसार यह दो सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 मई से 22 मई तक मसूरी और नई दिल्ली में चलाया जा रहा है। भारत और सेशेल्स के बीच इसी वर्ष फरवरी में हुए समझौते के तहत अगले तीन वर्षों में 250 सिविल सेवकों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुशासन केंद्र के महानिदेशक डॉ. सुरेंद्रकुमार बगड़े ने की। उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम अधिकारियों की व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य उन्हें प्रभावी राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में सक्षम बनाना है।
प्रतिनिधिमंडल प्रमुख एलेक्स हेंडरसन ने भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम क्षमता विकास को बढ़ाने के साथ दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को भी मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि भारत और सेशेल्स के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध इस पहल से और गहरे होंगे।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. बीएस बिष्ट ने जानकारी दी कि प्रशिक्षण में सुशासन के सिद्धांत, नीति निर्माण, तकनीकी नवाचार, न्यायिक सुधार, ई-कोर्ट प्रणाली, सरकारी खरीद में पारदर्शिता, एआई आधारित शासन व्यवस्था, पीएम गति शक्ति और प्रशासनिक नैतिकता जैसे विषय शामिल किए गए हैं। दूसरे चरण में प्रतिभागियों को विभिन्न संस्थानों का अध्ययन दौरा भी कराया जाएगा ताकि उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय सुशासन केंद्र अब तक 52 देशों के 5500 से अधिक सिविल सेवकों को प्रशिक्षण प्रदान कर चुका है, जिनमें श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार, केन्या, तंजानिया, ट्यूनीशिया, गाम्बिया, मालदीव सहित कई अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देश शामिल हैं।







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