मऊगंज, 14 मई।
जिले के हनुमना विकासखंड के कोढ़वा गांव में गहराता जल संकट ग्रामीणों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है और हालात ऐसे हो गए हैं कि पानी की कमी अब सामाजिक और पारिवारिक संबंधों पर भी असर डालने लगी है, जिससे कई महिलाएं परेशान होकर अपने ससुराल छोड़कर मायके लौटने को मजबूर हो रही हैं।
गांव में रोजमर्रा की शुरुआत ही पानी की तलाश के संघर्ष से होती है, जहां सुबह चार बजे से ही महिलाएं बाल्टी और बर्तन लेकर जल की व्यवस्था के लिए निकल पड़ती हैं। पथरीले भूभाग और लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण स्थिति दिन-ब-दिन और गंभीर होती जा रही है। पूरे गांव के लिए करीब दो किलोमीटर के दायरे में मात्र एक सरकारी नल उपलब्ध है, जहां पानी भरने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित गदाखुर स्कूल तक जाना पड़ रहा है। गांव का तालाब भी अब उपयोग योग्य नहीं रह गया है, क्योंकि उसका पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है और जानवर भी उसे पीने से बच रहे हैं।
पानी ढोने की मजबूरी का सीधा असर महिलाओं के स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है, जहां भारी बर्तन उठाने से वे लगातार शारीरिक समस्याओं का सामना कर रही हैं। वहीं बच्चे भी अपनी पढ़ाई छोड़कर परिवार की मदद के लिए पानी भरने में जुटने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक तंगी और पथरीली जमीन के कारण निजी बोरवेल लगाना संभव नहीं है, जिससे पूरा गांव सरकारी जल व्यवस्था पर निर्भर है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था जरूरत के अनुसार पानी उपलब्ध कराने में पूरी तरह असफल साबित हो रही है।
सरकारी ‘हर घर जल’ जैसी योजनाओं और दावों के बीच कोढ़वा गांव की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग की है ताकि उन्हें इस गहरे जल संकट से राहत मिल सके।








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