भोपाल, 09 मई।
मध्य प्रदेश में निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों के बाद अब अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ी संस्थाओं में पदों को लेकर हलचल बढ़ने लगी है। राज्य अल्पसंख्यक आयोग, उर्दू अकादमी, मदरसा बोर्ड और हज कमेटी जैसे संस्थानों में लंबे समय से कई अहम पद खाली पड़े हैं। ऐसे में इन ओहदों को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय की राजनीति भी सक्रिय होती दिखाई दे रही है।
प्रदेश में बीते एक वर्ष से इन संस्थाओं में अध्यक्ष और सदस्यों के कई पद रिक्त हैं। जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2023 में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष पद पर डॉ. सनवर पटेल की नियुक्ति के बाद अन्य संस्थाओं में कोई बड़ी नियुक्ति नहीं हुई। अब इन पदों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और विभिन्न स्तरों पर दावेदारी शुरू हो चुकी है।
राजनीतिक नियुक्तियों के मौजूदा दौर के बीच भाजपा नेतृत्व भी इन संस्थानों में नियुक्तियों को लेकर मंथन कर रहा है। पार्टी संगठन और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा से जुड़े कई नेता अलग-अलग पदों के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं। पार्टी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए अल्पसंख्यक वर्ग में अपनी पहुंच को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
प्रदेश की अल्पसंख्यक संस्थाओं की जिम्मेदारियां भी अलग-अलग हैं। राज्य अल्पसंख्यक आयोग समुदाय से जुड़े मामलों और शिकायतों पर कार्य करता है। मदरसा बोर्ड शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम और प्रशासनिक कामकाज देखता है। हज कमेटी हज यात्रा संबंधी व्यवस्थाओं और समन्वय की जिम्मेदारी निभाती है। वहीं उर्दू अकादमी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का कार्य करती है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा अल्पसंख्यक समाज के बीच पार्टी की स्वीकार्यता और संवाद को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करता है।












