गर्मी शुरू होते ही बड़े तालाब के किनारों पर जमीन दिखाई देने लगी है। विशेषज्ञों के अनुसार जलस्तर में गिरावट के पीछे प्राकृतिक और मानवीय दोनों कारण जिम्मेदार हैं। तेज गर्मी के कारण पानी का तेजी से वाष्पीकरण हो रहा है। साथ ही पिछले मानसून में अपेक्षाकृत कम वर्षा होने का असर भी अब सामने आने लगा है। दूसरी ओर शहर की बढ़ती आबादी के कारण पानी की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
बीते तीन वर्षों में बड़े तालाब के जलस्तर में लगातार गिरावट देखी गई है। तालाब का पूर्ण जलभराव स्तर 1666.80 फीट निर्धारित है, लेकिन मार्च 2024 तक इसका स्तर घटकर 1661.50 फीट तक पहुंच गया था। नवंबर 2023 से मार्च 2024 के बीच लगभग 5.3 फीट पानी कम दर्ज किया गया। अप्रैल और मई की गर्मी में बढ़े वाष्पीकरण ने स्थिति को और प्रभावित किया। हालांकि वर्ष 2025 में मानसून के बाद जुलाई तक जलस्तर बढ़कर 1663.20 फीट तक पहुंच गया था।
मई 2026 की शुरुआत में फिर एक बार हालात चिंताजनक नजर आ रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों द्वारा सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई जा रही है, जिससे आने वाले महीनों में पेयजल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि यदि जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और पानी की बर्बादी रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में भोपाल को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
नगर निगम का कहना है कि अब शहर की जल आपूर्ति केवल बड़े तालाब पर निर्भर नहीं है। बड़े तालाब के साथ नर्मदा जल की भी प्रतिदिन आपूर्ति की जा रही है। नगर निगम के जल विभाग के अनुसार वर्तमान में बड़े तालाब से प्रतिदिन 25 एमडी पानी लिया जा रहा है और जलस्तर की रोजाना निगरानी की जा रही है।












