सरकार व नीतियाँ
12 May, 2026

मध्य प्रदेश बना “गेहूं प्रदेश” – 365 लाख मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन, देश में 18% हिस्सेदारी

मध्य प्रदेश में गेहूं उत्पादन 365 लाख मीट्रिक टन से अधिक पहुंच गया है, जिससे राज्य देश में 18 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ “गेहूं प्रदेश” के रूप में उभरा है।

भोपाल, 12 मई।

मध्य प्रदेश ने गेहूं उत्पादन के क्षेत्र में देश में अपनी मजबूत पहचान बनाते हुए “गेहूं प्रदेश” का दर्जा हासिल कर लिया है। राज्य में इस वर्ष गेहूं उत्पादन 365.11 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जिससे देश में इसकी हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत हो गई है। उच्च गुणवत्ता वाली शरबती और ड्यूरम किस्मों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग ने प्रदेश को वैश्विक बाजार में भी मजबूती दी है।

प्रदेश में उत्पादकता बढ़कर 3780 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। शरबती और ड्यूरम गेहूं की मांग अमेरिका, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, दुबई और दक्षिण अफ्रीका सहित 40 से अधिक देशों में बनी हुई है। राज्य का गेहूं निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान है, जो देश के कुल निर्यात का लगभग 35 से 40 प्रतिशत माना जा रहा है।

सरकारी जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश का गेहूं ब्रेड, बिस्किट और पास्ता निर्माण के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है। वर्ष 2004–05 में जहां गेहूं की खेती 42 लाख हेक्टेयर में होती थी, वहीं अब यह बढ़कर 96.58 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। यह वृद्धि किसानों के लिए लागू योजनाओं और नीतियों का परिणाम बताई जा रही है।

अनुसंधान रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश के गेहूं में औसतन 12.6 प्रतिशत प्रोटीन, 43.6 पीपीएम आयरन और 38.2 पीपीएम जिंक पाया गया है। कठिया प्रजाति के गेहूं में पोषक तत्वों की अधिकता इसे और भी मूल्यवान बनाती है।

प्रदेश में विकसित की गई किस्में जैसे जे.डब्ल्यू.एस.17, जे.डब्ल्यू.3020 और जे.डब्ल्यू.321 सीमित सिंचाई में भी अच्छा उत्पादन देती हैं, जबकि जे.डब्ल्यू.1142 और जे.डब्ल्यू.3288 उच्च तापमान में भी बेहतर उपज देने में सक्षम हैं। इसके अलावा एमपीआर 1215 जैसी किस्में निर्यात के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।

अब तक राज्य में गेहूं की 51 किस्में विकसित की जा चुकी हैं, जिनमें से 12 किस्में पिछले एक दशक में तैयार की गई हैं। वर्ष 2026 में उपयोग में आने वाली पांच प्रमुख किस्मों में से चार मध्य प्रदेश में विकसित हुई हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार गेहूं उपार्जन लक्ष्य को 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। किसानों से 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस शामिल है। उपार्जन प्रक्रिया 23 मई तक जारी रहेगी।

प्रदेश को देश का सबसे बड़ा प्रामाणिक बीज उत्पादक राज्य भी माना जा रहा है, जहां तीन लाख से अधिक किसान बीज उत्पादन कंपनियों से जुड़े हुए हैं। इससे राज्य कृषि उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में लगातार अग्रणी स्थिति में बना हुआ है।

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