मध्य प्रदेश
13 May, 2026

मध्य प्रदेश में बाल बजट विस्तार के साथ समन्वित शासन मॉडल को मिली नई दिशा

मध्य प्रदेश में बाल बजट में ऐतिहासिक वृद्धि और 19 विभागों के समन्वय के साथ बच्चों के समग्र विकास और परिणाम आधारित बजटिंग पर जोर दिया गया है।

भोपाल, 13 मई।

मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा है कि राज्य में बच्चों का समग्र विकास ही सतत और समावेशी प्रगति की मजबूत नींव है। उन्होंने यह बात भोपाल के एक होटल में महिला एवं बाल विकास विभाग और यूनिसेफ के संयुक्त आयोजन में आयोजित ‘चाइल्ड बजटिंग इन मध्य प्रदेश’ विषयक प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान कही।

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2026–27 के बजट में सरकार ने बच्चों के विकास को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। इस वर्ष बजट में 26 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि स्वास्थ्य और पोषण के लिए 23 हजार 747 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें पोषण से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। शिक्षा क्षेत्र के लिए राज्य के कुल व्यय का 13.7 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों का विकास केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। अब चाइल्ड बजट स्टेटमेंट में 19 विभागों को शामिल किया गया है, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य और सामाजिक न्याय जैसे विभाग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सभी विभाग समन्वय के साथ काम नहीं करेंगे, तब तक योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर पर नहीं पहुंचेगा।

मंत्री ने प्रदेश के सभी 55 जिलों की भिन्न-भिन्न परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर जिले की बच्चों से जुड़ी आवश्यकताएं अलग हो सकती हैं, इसलिए स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाना आवश्यक है।

महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त ने कहा कि प्रदेश की लगभग चालीस प्रतिशत आबादी तीन करोड़ बच्चों की है, जो राज्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हैं। उन्होंने चाइल्ड बजट की रिपोर्टिंग को और अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया तथा कहा कि केवल आंकड़ों के बजाय योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन आवश्यक है।

यूनिसेफ के प्रतिनिधि ने कहा कि मध्य प्रदेश ने चाइल्ड बजटिंग में पांच वर्ष पूरे कर लिए हैं और यह प्रक्रिया अब केवल खर्च की रिपोर्टिंग से आगे बढ़कर परिणाम आधारित बजटिंग की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में जनजातीय आबादी को देखते हुए बजट में समानता और संतुलन पर विशेष ध्यान जरूरी है।

यूनिसेफ की सोशल पॉलिसी प्रमुख ने इस पहल को अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार मानकों के अनुरूप बताया और कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए बच्चों में निवेश को केवल लाभार्थी दृष्टि से नहीं, बल्कि उत्पादकता के आधार पर देखना होगा।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए बाल बजट के अंतर्गत 75 हजार 587 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो कुल राज्य बजट का 19.4 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद का 4.1 प्रतिशत है। वर्ष 2022 में शुरू हुई इस पहल के बाद अब यह प्रक्रिया अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है और इसमें विभागों की भागीदारी 17 से बढ़कर 19 हो गई है, जो पूरे शासन तंत्र के समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने बजट निर्माण और उसके क्रियान्वयन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

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