नई दिल्ली, 13 मई।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 2026-27 विपणन सत्र के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना है।
सबसे अधिक बढ़ोतरी सूरजमुखी के बीज के एमएसपी में दर्ज की गई है, जिसमें 622 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, इसके बाद कपास में 557 रुपये, नाइजरसीड में 515 रुपये और तिल में 500 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
मुख्य अनाज फसलों में सामान्य धान का एमएसपी बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 72 रुपये अधिक है, जबकि ग्रेड ए धान का मूल्य 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
मक्का का एमएसपी 2,410 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, वहीं बाजरा 2,900 रुपये प्रति क्विंटल और रागी 5,205 रुपये प्रति क्विंटल पर निर्धारित किया गया है, जिससे मोटे अनाजों को भी बढ़ावा मिलेगा।
दलहन फसलों में तूर/अरहर का एमएसपी बढ़ाकर 8,450 रुपये प्रति क्विंटल, मूंग 8,780 रुपये प्रति क्विंटल और उड़द 8,200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिससे दाल उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।
तिलहन श्रेणी में सूरजमुखी का एमएसपी 8,343 रुपये, सोयाबीन 5,708 रुपये, तिल 10,346 रुपये, मूंगफली 7,517 रुपये और नाइजरसीड 10,052 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
कपास के दामों में भी बढ़ोतरी की गई है, जिसमें मीडियम स्टेपल कपास का एमएसपी 8,267 रुपये और लॉन्ग स्टेपल कपास का 8,667 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
कृषि मंत्रालय ने बताया कि ये संशोधित एमएसपी 2018-19 के उस बजट प्रावधान के अनुरूप हैं, जिसमें लागत मूल्य से कम से कम 1.5 गुना समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने की बात कही गई थी।
आधिकारिक अनुमान के अनुसार मूंग पर किसानों को उत्पादन लागत से 61 प्रतिशत अधिक लाभ मिलेगा, जबकि बाजरा और मक्का पर 56-56 प्रतिशत और तूर/अरहर पर 54 प्रतिशत लाभ का अनुमान है, जबकि अन्य फसलों में यह लाभ लगभग 50 प्रतिशत रहेगा।
सरकार ने कहा कि दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए “श्री अन्न” के तहत अपेक्षाकृत अधिक एमएसपी वृद्धि की नीति जारी रखी गई है।
पिछले दशक में एमएसपी खरीद और भुगतान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें 2014-15 से 2025-26 के बीच धान की खरीद 8,418 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के बीच यह 4,590 लाख मीट्रिक टन थी।
इसी प्रकार 14 खरीफ फसलों की कुल खरीद भी पिछले दशक में लगभग दोगुनी होकर 8,746 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई, जबकि पहले यह 4,679 लाख मीट्रिक टन थी।
धान किसानों को 2014-15 से 2025-26 के बीच 16.08 लाख करोड़ रुपये का एमएसपी भुगतान किया गया, जबकि पहले यह 4.44 लाख करोड़ रुपये था।
सभी 14 खरीफ फसलों पर कुल एमएसपी भुगतान पिछले दशक में 18.99 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पहले के दशक के 4.75 लाख करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है।
सरकार ने कहा कि ये बढ़ोतरी किसानों की आय सुरक्षा, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और घरेलू कृषि उत्पादन को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है।










.jpg)


.jpg)

