देहरादून, 28 अप्रैल
उत्तराखंड विधानसभा के ‘नारी सम्मान-लोकतंत्र में अधिकार’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय विशेष सत्र में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की मौजूदगी में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर उनके रुख की निंदा का प्रस्ताव पारित करा दिया, जिससे विपक्ष असहज स्थिति में आ गया।
सदन की कार्यवाही शाम 6 बजकर 10 मिनट पर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले मंगलवार को हुए विशेष सत्र में महिला सशक्तिकरण, अधिकार और समान भागीदारी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सत्र के दौरान विभिन्न दलों के सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और आंगनबाड़ी मानदेय, शिक्षा व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। सत्ता पक्ष ने अपनी नीतियों और उपलब्धियों का पक्ष मजबूती से रखा, वहीं विपक्ष ने कई मुद्दों पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही की मांग की।
चर्चा के दौरान सदन का माहौल कई बार तीखा भी हुआ, हालांकि लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप संवाद जारी रहा। इस दौरान सत्ता पक्ष ने राज्य आंदोलन से जुड़े खटीमा गोलीकांड, मसूरी गोलीकांड और रामपुर तिराहा कांड का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न सवालों का तथ्यात्मक जवाब देते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के मानदेय, मदरसा शिक्षा और चारधाम यात्रा पर सरकार की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के मानदेय में पहले ही वृद्धि की जा चुकी है और भविष्य में भी सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे।
मदरसा शिक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पुरानी कुप्रथाओं और कबीलाई मानसिकता को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा तथा अल्पसंख्यक बच्चों को नई शिक्षा नीति से जोड़कर समान अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
चारधाम यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर राजनीतिक आरोप लगाए और कहा कि पवित्र यात्रा को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।
सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के रुख को महिला विरोधी बताया। खास बात यह रही कि इस बार कांग्रेस सदन से वॉकआउट नहीं कर सकी और उनकी मौजूदगी में ही निंदा प्रस्ताव पारित हो गया, जिससे विपक्ष को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।
सदन में केवल आलोचना ही नहीं हुई, बल्कि एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किया गया जिसमें केंद्र सरकार से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण शीघ्र लागू करने का अनुरोध किया गया। इसे महिला भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।













