नई दिल्ली, 09 अप्रैल।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आंतरिक ज्ञान की अहमियत को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। उन्होंने कहा कि यही ज्ञान मानव जीवन और राष्ट्र की तरक्की का असली आधार है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय संस्कृति और विरासत ने हमेशा यह सिखाया है कि सच्चा ज्ञान और उसका सही उपयोग ही किसी राष्ट्र की प्रगति का मुख्य आधार है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस मार्ग पर चलते हुए देश के युवा समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, युवाओं की यह भागीदारी भविष्य के भारत को दिशा देने में निर्णायक है।
नरेन्द्र मोदी ने आगे कहा कि जो ज्ञान हमारे भीतर स्थित है, वह सामान्य बाहरी ज्ञान से भी श्रेष्ठ है। यही आंतरिक ज्ञान संसार का वास्तविक सार है और विद्वानों द्वारा पूजनीय माना जाता है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा: “हमारी विरासत और संस्कृति हमें यही सिखाती आई है कि सच्चा ज्ञान और उसका सदुपयोग ही राष्ट्र की प्रगति का आधार है। इसी मार्ग पर चलकर आज हमारे देश के युवा समृद्ध और सशक्त भारत को गढ़ने में जुटे हैं।
संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए उन्होंने कहा:अन्तःस्थमेव यज्ज्ञानं ज्ञानादपि च यत्परम्। तदेव सर्वसंसारसारं सद्भिरुपास्यते॥
इसका अर्थ है कि जो ज्ञान हमारे भीतर स्थित है और सामान्य ज्ञान से भी श्रेष्ठ है, वही इस संसार का असली सार है। श्रेष्ठ व्यक्तियों द्वारा उसी आंतरिक ज्ञान की उपासना की जाती है।







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