नई दिल्ली, 01 मई।
महाराष्ट्र स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर राज्य के विकास, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान की सराहना की है। अपने विस्तृत पत्र में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आर्थिक विकास को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और “विकसित महाराष्ट्र” का विजन वर्ष 2047 तक “विकसित भारत” के लक्ष्य के साथ पूरी तरह सामंजस्य रखता है।
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में महाराष्ट्र की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य सामाजिक सुधार, आध्यात्मिक चेतना और औद्योगिक प्रगति का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, लोकमान्य तिलक और वीर सावरकर जैसे महान विभूतियों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरणा देते हैं। उन्होंने संत परंपरा और वारकरी आंदोलन को समाज में समानता और भक्ति की भावना को मजबूत करने वाला बताया।
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2026 को महाराष्ट्र के लिए विशेष वर्ष बताया, जिसमें अहिल्याबाई होल्कर की त्रिशताब्दी, महात्मा ज्योतिबा फुले की द्विशताब्दी, संत गाडगे बाबा की 150वीं जयंती, चवदार तालाब सत्याग्रह के 100 वर्ष, डॉ. आंबेडकर से जुड़े ऐतिहासिक स्मरण और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष जैसे महत्वपूर्ण आयोजन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी अवसर सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक जागरूकता को और मजबूत करेंगे।
पत्र में मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने को भी गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया गया। साथ ही महाराष्ट्र के किलों को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने को राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान की वैश्विक मान्यता बताया गया।
आर्थिक प्रगति पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र निवेश, उद्योग और आधारभूत ढांचे के विकास में अग्रणी राज्य है। केंद्र सरकार द्वारा राज्य में रेलवे, मेट्रो, हवाई अड्डे और बंदरगाह जैसी परियोजनाओं को गति दी जा रही है, जिसमें रेलवे विकास के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान भी शामिल है।
उन्होंने गढ़चिरौली, अमरावती, धुले और नंदुरबार जैसे क्षेत्रों में हो रहे तेजी से विकास को रेखांकित करते हुए इन्हें नए निवेश और रोजगार केंद्र के रूप में उभरते बताया। साथ ही राज्य सरकार द्वारा 2029, 2035 और 2047 को ध्यान में रखकर तैयार किए गए दीर्घकालिक विकास रोडमैप को “विकसित भारत” के लक्ष्य के अनुरूप बताया।
प्रधानमंत्री ने जल संकट वाले क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों, सहकारिता मॉडल के विस्तार और आगामी कुंभ मेले की तैयारियों की भी सराहना की। अंत में उन्होंने महाराष्ट्र के समृद्ध इतिहास और परंपरा को नमन करते हुए राज्य के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।









