नई दिल्ली, 12 मई।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक 1.98 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो लगातार चौथे वर्ष लाभप्रदता को दर्शाता है। वित्त मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार यह मजबूत प्रदर्शन ऋण वृद्धि, परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार, वसूली में तेजी और पूंजी स्थिति के सुदृढ़ होने का परिणाम है, जो बैंकिंग क्षेत्र में चल रहे सुधारों और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था को दर्शाता है।
इस अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल कारोबार 12.8 प्रतिशत बढ़कर 283.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि जमा राशि 10.6 प्रतिशत बढ़कर 156.3 लाख करोड़ रुपये और सकल अग्रिम 15.7 प्रतिशत बढ़कर 127 लाख करोड़ रुपये हो गए। खुदरा, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्रों में ऋण वृद्धि व्यापक रही, जिसमें खुदरा ऋण 18.1 प्रतिशत, कृषि ऋण 15.5 प्रतिशत और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम ऋण 18.2 प्रतिशत बढ़ा।
मंत्रालय के अनुसार यह वृद्धि उद्यमिता, वित्तीय समावेशन और अर्थव्यवस्था की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने में इन बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है। परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ, जिसमें सकल अनर्जक परिसंपत्ति अनुपात 1.93 प्रतिशत और शुद्ध अनर्जक परिसंपत्ति अनुपात घटकर 0.39 प्रतिशत रह गया, जो अब तक का न्यूनतम स्तर है।
सभी बैंकों का प्रावधान कवरेज अनुपात 90 प्रतिशत से अधिक बना रहा, जबकि वसूली दर में सुधार हुआ और कुल वसूली 86,971 करोड़ रुपये रही। बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और ऋण विस्तार के कारण परिचालन लाभ 3.21 लाख करोड़ रुपये पहुंचा तथा शुद्ध लाभ 11.1 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गया।
पूंजी स्थिति भी मजबूत रही, जिसमें पूंजी पर्याप्तता अनुपात 16.6 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो नियामकीय आवश्यकता से अधिक है। इस दौरान बैंकों ने आंतरिक अर्जन और 50,551 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने के माध्यम से अपनी स्थिति को मजबूत किया। लागत-आय अनुपात घटकर 49.67 प्रतिशत हो गया, जो डिजिटल तकनीक और बेहतर प्रबंधन का परिणाम है।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बैंकिंग क्षेत्र में निरंतर सुधारों का परिणाम है, जिससे बैंक अधिक सुदृढ़, लाभकारी और विकास लक्ष्यों को समर्थन देने में सक्षम हुए हैं।








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