पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता के बीच अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की आर्थिक वृद्धि से जुड़े अनुमान को नीचे कर दिया है। वर्ष 2026 के लिए विकास दर के अनुमान में 0.8 प्रतिशत की कमी करते हुए इसे छह प्रतिशत आंका गया है।
एजेंसी का कहना है कि देश में उपभोक्ता मांग में गिरावट और उद्योगों की गतिविधियों में आई सुस्ती के साथ ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी ने आर्थिक रफ्तार को प्रभावित किया है। इन कारकों का सीधा असर भारत की समग्र वृद्धि पर दिखाई दे रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आने वाले महीनों में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी और ईंधन एवं उर्वरक की आपूर्ति में कमी का प्रभाव अलग-अलग देशों पर उनकी आर्थिक निर्भरता और ढांचागत मजबूती के अनुसार पड़ेगा।
मूडीज ने वैश्विक आर्थिक माहौल को अभी भी अस्थिर और अनिश्चित बताया है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रवाह पर दबाव बना रहने की आशंका जताई गई है।
वर्ष 2027 के लिए भी भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 0.5 प्रतिशत घटाकर छह प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि एजेंसी का मानना है कि जैसे-जैसे ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होगी और वैश्विक व्यापार व्यवस्था स्थिर होगी, आर्थिक गतिविधियों में सुधार देखने को मिलेगा।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से विशेष रूप से प्रभावित होता है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर होकर पूरा करता है।
इसके विपरीत केंद्रीय बैंक की ओर से जारी अनुमान में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर 6.9 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है, जो अपेक्षाकृत अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।



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